1 00:00:02,000 --> 00:00:04,000 ये 'ईएसओ' प्रसारण है. 2 00:00:04,260 --> 00:00:07,890 अग्रणी विज्ञान और 'ईएसओ' के नेपथ्य की झलकियाँ. 3 00:00:07,890 --> 00:00:10,310 'ईएसओ' यानि द यूरोपीयन सदर्न आब्जर्वेटरी 4 00:00:10,500 --> 00:00:17,980 ब्रह्माण्ड को टटोलते हुए हमारे सूत्रधार डा० जो लिस्क बनाम डा० जे के साथ. 5 00:00:20,000 --> 00:00:23,500 हैलो, स्वागत है आपका 'ईएसओ' प्रसारण के इस विशेष अंक में. 6 00:00:23,500 --> 00:00:27,850 ये आपको 'ईएसओ' की अक्टूबर में पचासवीं वर्षगाँठ तक ले जायेगा. 7 00:00:27,850 --> 00:00:30,630 हम आपके लिए आठ विशेष अंक लेकर प्रस्तुत होंगे जिनमें आप ... 8 00:00:30,630 --> 00:00:35,560 'ईएसओ' के दक्षिण के आकाश के अन्वेषण के विगत पचास गौरवशाली वर्षों की गाथा देखेंगे. 9 00:00:39,080 --> 00:00:43,000 जीवन की खोज. 10 00:00:45,500 --> 00:00:48,470 क्या आपने कभी ब्रह्माण्ड में जीवन के बारे में सोचा है? 11 00:00:48,470 --> 00:00:51,600 दूरवर्ती तारों के गिर्द जीव सृष्टि से ओतप्रोत ग्रह? 12 00:00:51,600 --> 00:00:54,500 सदियों से खगोलशास्त्री इस विषय पर चिंतन करते रहे हैं. 13 00:00:54,500 --> 00:00:58,950 आखिर ब्रह्माण्ड में इतनी सारी मंदाकिनियाँ बिखरी पड़ी हैं और प्रत्येक में ढेर सारे तारे हैं 14 00:00:58,950 --> 00:01:01,140 तो फिर पृथ्वी ही विशिष्ट क्यों? 15 00:01:02,500 --> 00:01:07,110 सन् 1995 में स्विस खगोलशास्त्री माइकेल मेयर और डिडियर क्विलोज़ 16 00:01:07,110 --> 00:01:11,660 वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने हमरे सौर मण्डल के बाहर एक सामान्य तारे की परिक्रमारत ग्रह को खोजा. 17 00:01:12,000 --> 00:01:16,490 तबसे ग्रह-खोजियों ने सैकड़ों दूसरे बाह्य ग्रह खोज निकाले हैं. 18 00:01:16,490 --> 00:01:21,780 छोटे-बड़े, गर्म-ठंडे विविध प्रकार के ग्रह. 19 00:01:22,600 --> 00:01:26,800 अब हम पृथ्वी जैसे ग्रहों को बस खोजने ही वाले हैं. 20 00:01:27,290 --> 00:01:33,290 और फिर भविष्य में: ऐसा ग्रह जिसपर जीवन हो - खगोलशास्त्रियों की मृगतृष्णा. 21 00:01:39,590 --> 00:01:43,070 यूरोपीयन सदर्न आब्जर्वेटरी बाह्य ग्रहों की खोज में 22 00:01:43,070 --> 00:01:45,310 प्रमुख भूमिका निभाती है. 23 00:01:46,290 --> 00:01:50,560 माइकेल मेयर के दल ने सेरो ला सिला से सैकड़ों बाह्य ग्रह खोज निकले हैं. 24 00:01:50,560 --> 00:01:53,880 यह स्थान चिली में हमारा प्रथम चरण था. 25 00:01:54,890 --> 00:01:56,880 यहाँ ये कोराली वर्णक्रममापी है, 26 00:01:56,880 --> 00:02:00,120 जो स्विस लियोंहार्ड आयलर दूरबीन पर लगा है. 27 00:02:02,030 --> 00:02:07,940 इसका काम है तारों में हलकी सी लड़खड़ाहट को मापना जो उनके गिर्द घूमते ग्रहों की गतियों के गुरुत्व के कारण उत्पन्न होती है. 28 00:02:07,940 --> 00:02:14,910 'ईएसओ' की सम्मान्य 3.6 मीटर व्यास की दूरबीन भी इस कार्य में सन्नद्ध है. 29 00:02:16,200 --> 00:02:19,320 इसका हार्प्स वर्णक्रममापी दुनिया भर में सबसे अधिक अचूक है. 30 00:02:19,320 --> 00:02:23,680 इसने अबतक 150 से अधिक ग्रह खोजे हैं. 31 00:02:28,750 --> 00:02:30,360 इसका सबसे बड़ा विजय चिन्ह है 32 00:02:30,360 --> 00:02:36,950 ये पांच से सात बाह्य ग्रहों का समृद्ध 'सौर मंडल'. 33 00:02:48,330 --> 00:02:50,960 पर बाह्य ग्रहों को खोजने के दूसरे तरीके भी हैं 34 00:02:59,130 --> 00:03:05,350 जैसे 1.5 मीटर व्यास की इस डेनिश दूरबीन ने एक दूरवर्ती ग्रह खोजा 35 00:03:05,350 --> 00:03:08,350 वो ग्रह पृथ्वी से पांच गुना वजनी निकला. 36 00:03:12,500 --> 00:03:16,200 कैसे इसे खोजा गया? गुरुत्वीय माइक्रोलेंसिंग के द्वारा. 37 00:03:17,040 --> 00:03:22,150 हुआ यह कि वो ग्रह अपने पितृ तारे के के साथ पृष्ठभूमि के एक बड़े चमकीले तारे के सामने से गुज़रा. 38 00:03:22,150 --> 00:03:24,320 इससे वो आवर्धित हो दिखाई दिया. 39 00:03:26,420 --> 00:03:31,660 कभी कभी तो आप सीधे अपने कैमरे में बाह्य ग्रह को कैद कर सकते हैं. 40 00:03:34,960 --> 00:03:41,240 जैसे, 'वीएलटी' पर लगे 'नाको' नामक एडेप्टिव ऑप्टिक्स वाले कैमरे ने 41 00:03:41,240 --> 00:03:45,220 किसी बाह्य ग्रह की पहली तस्वीर आँकी. 42 00:03:45,220 --> 00:03:51,020 इस चित्र में ये लाल धब्बा एक विशाल ग्रह है जो एक भूरे वामन तारे की परिक्रमा कर रहा है. 43 00:03:54,880 --> 00:03:59,650 वर्ष 2010 में 'नाको' ने एक कदम और आगे बढ़ा. 44 00:04:01,440 --> 00:04:05,330 ये तारा पृथ्वी से 130 प्रकाश वर्ष दूर है. 45 00:04:05,330 --> 00:04:12,080 ये सूर्य से कम उमरदार और चमकीला है, इसके गिर्द चार ग्रह बड़ी कक्षाओं में घूमते हैं, 46 00:04:13,900 --> 00:04:18,970 'नाको' की गिद्ध जैसी पैनी आँख ने इस ग्रह 'स' के प्रकाश को मापा, 47 00:04:18,970 --> 00:04:23,490 यह एक गैसों का बना गुरु से भी दस गुना भारी है, 48 00:04:25,070 --> 00:04:27,450 पितृ तारे के प्रकाश की कौंध के बावजूद 49 00:04:27,450 --> 00:04:31,450 ग्रह के मंद प्रकाश को वर्णक्रम में फैलाना संभव हुआ. 50 00:04:31,450 --> 00:04:34,380 इससे ग्रह के वातावरण के बारे में जानकारी मिली. 51 00:04:36,270 --> 00:04:42,740 आज अधिकांश बाह्य ग्रह उस समय खोजे जाते हैं जब वे अपने पितृ तारे के सामने से गुजरते हैं. 52 00:04:42,740 --> 00:04:46,020 यदि हमारे लिए ग्रह का कक्षातल दृष्टि रेखा पर हो 53 00:04:46,020 --> 00:04:49,390 तो हमें बार बार यह घटना देखने को मिलेगी. 54 00:04:49,390 --> 00:04:53,870 इस प्रकार तारे की चमक में हो रहा बहुत थोड़ा आवर्ती ह्रास 55 00:04:53,870 --> 00:04:57,310 ग्रह की उपस्थिति का भेद खोल देता है. 56 00:05:00,010 --> 00:05:04,600 ला सिल्ला की ट्रापिस्ट दूरबीन इन दुष्प्राप्य संक्रमणों की खोज करेगी. 57 00:05:05,250 --> 00:05:06,570 इसी बीच, 58 00:05:06,570 --> 00:05:13,120 'वीएलटी' ने एक संक्रमण करते ग्रह का अध्ययन बड़ी सूक्ष्मता से किया. 59 00:05:13,910 --> 00:05:21,820 मिलिए GJ1214b से, हमारी अपनी पृथ्वी से 2.6 गुना भारी ग्रह. 60 00:05:24,010 --> 00:05:30,040 संक्रमण के समय ग्रह का वायुमंडल पितृ तारे के प्रकाश का आंशिक अवशोषण करता है. 61 00:05:34,200 --> 00:05:39,740 'ईएसओ' के सुग्राही फौर्स नामक वर्णक्रममापी ने यह पता चलाया था कि 62 00:05:39,740 --> 00:05:44,000 यह ग्रह गर्म और वाष्प से भरे 'सौना' जैसा है. 63 00:05:46,920 --> 00:05:51,060 गैस के बने दैत्याकार ग्रह और इस ग्रह जैसे 'सौना' जगत जीवन के लिए प्रतिकूल हैं. 64 00:05:51,060 --> 00:05:54,060 पर हमारी खोज जारी है. 65 00:05:55,010 --> 00:05:59,420 शीघ्र ही 'वीएलटी' पर एक नया 'स्फीयर' नामक उपकरण लगाया जाने वाला है. 66 00:05:59,420 --> 00:06:05,490 'स्फीयर' में मंद प्रकाश वाले ग्रहों को अपने पितृ तारों की कौंध में ढूंढ लेने की क्षमता होगी. 67 00:06:06,200 --> 00:06:12,140 वर्ष 2016 में एस्प्रेस्सो नामक वर्णक्रममापी 'वीएलटी' में आ जुड़ेगा. 68 00:06:12,140 --> 00:06:16,110 ये हार्प्स नामक उपकरण को भी मात दे देगा. 69 00:06:18,000 --> 00:06:21,850 और जब 'ईएसओ' की अत्यधिक बड़ी दूरबीन तैयार हो जायेगी, 70 00:06:21,850 --> 00:06:26,170 तब हम शायद धरती के परे के अन्य जीवमंडलों के चिन्ह खोज पायें. 71 00:06:33,480 --> 00:06:36,390 पृथ्वी पर जीवन प्रचुर मात्रा में है. 72 00:06:37,960 --> 00:06:46,640 उत्तरी चिली को कुदरत ने गिद्ध, विकुना नामक ऊँट, विज्काचास नामक खरगोश जैसे चूहे और विशाल कैक्टस के पौधे दिए हैं. 73 00:06:48,910 --> 00:06:53,830 यहाँ तक कि अटाकामा मरुस्थल की शुष्क धरती भी बड़े दमदार जीवाणुओं से ओतप्रोत है. 74 00:06:57,970 --> 00:07:02,300 हमने अन्तःतारकीय जगत में जीवन के मूल घटक खोज निकले हैं. 75 00:07:03,000 --> 00:07:05,790 हमने ये भी जान लिया है कि ढेर सारे ग्रह उपस्थित हैं. 76 00:07:10,110 --> 00:07:15,190 अरबों वर्ष पूर्व धूमकेतुओं पृथ्वी पर पानी और जैविक अणु लेकर आये थे. 77 00:07:17,540 --> 00:07:21,250 क्या ऐसा अन्यत्र होने की सम्भावना नहीं है? 78 00:07:26,500 --> 00:07:28,400 अथवा, क्या हम ब्रह्माण्ड में नितांत अकेले हैं? 79 00:07:30,040 --> 00:07:32,080 ये एक बहुत पुराना और बड़ा प्रश्न है. 80 00:07:33,480 --> 00:07:36,530 और इसका उत्तर बस हमारी मुट्ठी में आने ही वाला है. 81 00:07:46,000 --> 00:07:49,990 इसी के साथ मैं डा० जे 'ईएसओ' प्रसारण के इस विशेष अंक से आपसे विदा ले रहा हूँ. 82 00:07:49,990 --> 00:07:53,260 फिर मिलेंगे ब्रह्मांड की खोज के एक और दिलचस्प अभियान के साथ. 83 00:07:55,730 --> 00:07:57,500 'ईएसओ' प्रसारण 'ईएसओ' द्वारा प्रस्तुत किया गया, 84 00:07:57,500 --> 00:07:59,300 'ईएसओ' यानि यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला. 85 00:07:59,300 --> 00:08:01,500 'ईएसओ', यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला, 86 00:08:01,500 --> 00:08:03,000 खगोलशास्त्र की अग्रणी अंतर्शासकीय विज्ञान और तकनीकी संस्था है, 87 00:08:03,000 --> 00:08:05,000 जो सन्नद्ध है विश्व की भूतल स्थित सबसे अत्याधुनिक दूरबीनें बनाने में. 88 00:08:08,350 --> 00:08:13,240 प्रतिलेखन 'ईएसओ', अनुवाद - Piyush Pandey पीयूष पाण्डेय, JNMF, इलाहाबाद