1 00:00:02,080 --> 00:00:06,640 पैनी नज़र. 2 00:00:08,020 --> 00:00:11,590 जितनी बड़ी - उतनी बेहतर - कम से कम दूरबीन के दर्पण के बारे में यह कहा जा सकता है. 3 00:00:11,590 --> 00:00:16,670 पर बड़े दर्पण मोटे भी होने चाहिए अन्यथा वे अपने ही वज़न से विकृत हो जायेंगे. 4 00:00:17,340 --> 00:00:21,610 पर बहुत बड़े दर्पण विकृत हो ही जाते हैं चाहे हम उन्हें कितना ही मोटा और भारी क्यों न बना लें. 5 00:00:22,680 --> 00:00:29,360 समाधान? पतले हलके दर्पण और एक्टिव ऑप्टिक्स की जादुई तकनीक. 6 00:00:30,330 --> 00:00:33,350 'ईएसओ' ने 1980 के दशक में इस तकनीक को प्रशस्त किया, 7 00:00:33,350 --> 00:00:36,040 इससे अपनी 'न्यू टेक्नोलोजी टेलेस्कोप' को सुसज्जित किया. 8 00:00:37,450 --> 00:00:39,710 ये थी अद्यतन तकनीक. 9 00:00:39,710 --> 00:00:45,760 'वेरी लार्ज टेलेस्कोप' या 'वीएलटी' के बड़े दर्पणों का व्यास 8.2 मीटर है ... 10 00:00:45,760 --> 00:00:48,500 पर उनकी मोटाई मात्र 20 सेमी० है. 11 00:00:49,330 --> 00:00:50,330 यह जादू संभव हुआ है 12 00:00:50,990 --> 00:00:53,330 कम्पयूटर नियंत्रित सहारों या टेकों के द्वारा जो ये 13 00:00:53,330 --> 00:00:59,080 सुनिश्चित करते हैं कि दर्पण नैनोमीटर की परिशुद्धता से अपना सही आकार बनाये रखे. 14 00:01:15,640 --> 00:01:18,950 'वीएलटी' 'ईएसओ' की प्रमुख सेवा है. 15 00:01:18,950 --> 00:01:25,860 इसमें चार एक जैसी दूरबीने एकजुट होकर उत्तरी चिली के सेर्रो पारनाल शिखर पर कार्य करती हैं. 16 00:01:25,860 --> 00:01:28,040 1990 के दशक में निर्मित, 17 00:01:28,040 --> 00:01:32,740 ये खगोलशास्त्रियों को अत्याधुनिक टेक्नोलोजी प्रदान करती हैं. 18 00:01:37,580 --> 00:01:42,930 आटाकामा के मरुस्थल बीच 'ईएसओ' ने मानों खगोलशास्त्रियों के लिए स्वर्ग का निर्माण कर दिया हो. 19 00:01:58,240 --> 00:02:00,560 वैज्ञानिक 'ला रेसिदेंसिया' नामक भवन में रहते हैं 20 00:02:00,560 --> 00:02:04,240 - एक अतिथि गृह जो - हमारे ग्रह के सबसे सूखे स्थान पर 21 00:02:04,240 --> 00:02:06,390 - आंशिक रूप से धूल-मिट्टी के नीचे दबा है 22 00:02:06,870 --> 00:02:12,940 पर यहाँ अंदर छिपे हैं ताड़ के हरे वृक्ष, तरण-ताल, ... और चिली की स्वादिष्ट मिठाइयां 23 00:02:16,260 --> 00:02:16,530 पर 24 00:02:16,530 --> 00:02:21,020 'वीएलटी' की प्रमुख विशिष्टता इसका तरण-ताल नहीं है, 25 00:02:21,020 --> 00:02:24,790 वो है इसके द्वारा संभव हुआ ब्रह्मांड का अद्वितीय परिदृश्य. 26 00:02:29,600 --> 00:02:33,710 बिना पतले दर्पणों और एक्टिव ऑप्टिक्स के 'वीएलटी' संभव न थी. 27 00:02:34,200 --> 00:02:35,280 पर इसकी और भी विशिष्टतायें हैं. 28 00:02:35,280 --> 00:02:40,550 किसी भी दूरबीन से, चाहे वो सबसे बड़ी क्यों न हो तारे धुंधले दिखाई देते हैं. 29 00:02:40,550 --> 00:02:44,590 कारण? हमारा वायुमंडल बिम्ब को विकृत कर देता है. 30 00:02:49,300 --> 00:02:53,410 यहाँ प्रवेश लेता है हमारा दूसरा जादू - एडैप्टिव ऑप्टिक्स. 31 00:02:55,130 --> 00:03:01,410 पारनाल वेधशाला से लेज़र प्रकाश किरणें ऊपर आकाश पर जाकर कृत्रिम तारों का निर्माण करती हैं. 32 00:03:01,410 --> 00:03:05,020 नीचे पृथ्वी पर लगे संसूचक इन तारों की मदद से ये ज्ञात कर लेते हैं कि वातावरण कितनी विकृति पैदा कर रहा है. 33 00:03:05,020 --> 00:03:08,150 यह मापन एक सेकिंड में सैकड़ों बार किया जाता है. 34 00:03:08,150 --> 00:03:12,420 और हर बार कम्पयूटर विकृतिशील दर्पणों को नियंत्रित कर बिम्ब में सुधार करता है. 35 00:03:13,930 --> 00:03:19,690 और परिणाम? ऐसा लगता है मानों वायुमंडल की हलचल पूरी तरह समाप्त हो गयी हो. 36 00:03:20,090 --> 00:03:21,450 आप स्वयं इस अन्तर को देखिये. 37 00:03:28,470 --> 00:03:31,880 आकाशगंगा एक विशाल सर्पिलाकार मन्दाकिनी है. 38 00:03:31,880 --> 00:03:36,190 और 27,000 प्रकाशवर्ष दूर इसके केन्द्रीय भाग के 39 00:03:36,190 --> 00:03:41,630 रहस्य को 'ईएसओ' की 'वीएलटी' ने सुलझाया. 40 00:03:43,859 --> 00:03:47,510 विशालकाय धूल के बादलों के कारण यह भाग अदृश्य रहता है. 41 00:03:47,510 --> 00:03:51,560 पर सुग्राही अवरक्त प्रकाश कैमरे उस धूल को भेदकर 42 00:03:51,560 --> 00:03:54,290 उस पार क्या है उसे देख सकते हैं. 43 00:04:00,220 --> 00:04:05,560 एडैप्टिव ऑप्टिक्स के सहारे वहां दर्जनों लाल दानव तारे खोजे गए हैं. 44 00:04:05,870 --> 00:04:09,500 और समय के बीतने के साथ ये भी पाया गया कि ये तारे गतिमान हैं. 45 00:04:09,500 --> 00:04:14,270 वे आकाशगंगा के केन्द्र में स्थित किसी अदृश्य पिंड की परिक्रमा कर रहे हैं. 46 00:04:16,040 --> 00:04:21,670 केन्द्र के परिक्रमारत तारों की गतियाँ संकेत देती हैं कि वह पिंड बहुत भारी होगा. 47 00:04:22,440 --> 00:04:29,000 एक दैत्याकार श्याम विवर या 'ब्लैक होल' - संहति सूर्य की 43 लाख गुना. 48 00:04:29,730 --> 00:04:33,760 खगोलशास्त्रियों ने वहां श्याम विवर में गिरते गैस के बादलों में 49 00:04:33,760 --> 00:04:35,510 शक्तिशाली कौंध का प्रेक्षण किया है 50 00:04:35,510 --> 00:04:40,460 यह सब संभव हुआ है एडैप्टिव ऑप्टिक्स कि शक्ति से. 51 00:04:42,340 --> 00:04:47,050 तो पतले दर्पण और एक्टिव ऑप्टिक्स ने बड़ी दूरबीनों का निर्माण संभव कर दिया - 52 00:04:47,050 --> 00:04:50,050 एडैप्टिव ऑप्टिक्स ने वातावरण की झिलमिलाहट खत्म की 53 00:04:50,050 --> 00:04:53,430 और इस प्रकार हमें मिले एकदम प्रखर एवं सुस्पष्ट चित्र. 54 00:04:54,210 --> 00:04:56,260 पर अभी हमारा जादू का पिटारा खाली नहीं हुआ है. 55 00:04:56,260 --> 00:05:00,440 एक और तीसरा जादू है व्यतिकरणमापन या 'इंटरफैरोमैट्री'. 56 00:05:03,080 --> 00:05:06,030 'वीएलटी' में चार दूरबीनें हैं. 57 00:05:06,030 --> 00:05:12,170 ये साथ में मिलकर 130 मीटर आभासी व्यास की बड़ी दूरबीन बन जाती हैं. 58 00:05:14,730 --> 00:05:20,350 प्रत्येक दूरबीन का प्रकाश निर्वात की हुयी सुरंग से 59 00:05:20,350 --> 00:05:23,460 धरती के नीचे प्रयोगशाला में लाया जाता है 60 00:05:25,220 --> 00:05:31,280 यहाँ प्रकाश तरंगों को लेज़र मापन एवं विशेष 'डिले लाइन' की तकनीक से जोड़ा जाता है. 61 00:05:36,160 --> 00:05:41,070 इस प्रकार 8.2 मीटर व्यास की चार दूरबीनों की प्रकाशग्राही क्षमता जुड़कर 62 00:05:41,070 --> 00:05:47,370 एक पचास टेनिस कोर्ट के तुल्य काल्पनिक दूरबीन सी हो जाती है. 63 00:05:50,240 --> 00:05:54,010 साथ की चार अन्य छोटी सहायक दूरबीनें इस समायोजन को और भी लचीला बना देती हैं. 64 00:05:54,010 --> 00:05:57,340 यूँ तो चार विशाल दूरबीनों के समक्ष ये बौनी नजर आती हैं 65 00:05:57,340 --> 00:06:01,990 प्रत्येक में मात्र 1.8 मीटर व्यास का दर्पण लगा है. 66 00:06:01,990 --> 00:06:07,580 फिर भी ये सौ साल पहले की सबसे बड़ी दूरबीन से भी बड़ा है! 67 00:06:09,300 --> 00:06:12,070 व्यतिकरणमापन या ऑप्टिकल इंटरफैरोमैट्री एक जादू जैसा है. 68 00:06:12,070 --> 00:06:16,270 तारों के प्रकाश का जादू जो यहाँ मरुस्थल में मुखर हो रहा है. 69 00:06:16,270 --> 00:06:20,270 परिणाम बहुत ही कारगर साबित हुए हैं. 70 00:06:22,380 --> 00:06:26,850 'वैरी लार्ज टेलेस्कोप' का व्यतिकरणमापी हबल अंतरिक्ष दूरबीन से 71 00:06:26,850 --> 00:06:28,920 पचास गुना अधिक सुस्पष्टता देता है. 72 00:06:31,990 --> 00:06:36,220 उदाहरण के लिए इस युगल तारे में इस भक्षी को देखिये. 73 00:06:38,180 --> 00:06:41,050 ये अपने साथी तारे से पदार्थ चुराकर उसका भक्षण कर रहा है. 74 00:06:45,690 --> 00:06:50,470 बीटलजूस या काक्षी तारे से यदा कदा धुंए और धूल के छल्ले निकलते देखे गए हैं. 75 00:06:50,470 --> 00:06:54,430 ये एक दैत्य तारा है जिसका कभी भी सुपरनोवा के रूप में विस्फोट हो सकता है. 76 00:06:56,770 --> 00:07:02,020 और, नवजात तारों के गिर्द खगोलशास्त्रियों को धूल भरी चकतियाँ... 77 00:07:03,010 --> 00:07:06,370 जो भविष्य के पृथ्वी जैसे संसारों का उपादान या कच्चा माल है. 78 00:07:07,100 --> 00:07:12,710 'वैरी लार्ज टेलेस्कोप' मानव अंतरिक्ष में गड़ी सबसे पैनी आँख है. 79 00:07:13,400 --> 00:07:16,780 पर खगोलशास्त्रियों के पास ऐसी दूसरी विधाएं भी हैं जिनसे वे अपने आयाम को बढ़ा लेते हैं... 80 00:07:16,780 --> 00:07:18,890 और विचारों को भी. 81 00:07:18,890 --> 00:07:21,720 यूरोपीयन सदर्न आब्जर्वेटरी में 82 00:07:21,720 --> 00:07:27,610 उन्होंने ब्रह्मांड को एक एकदम नए नजरिये से देखना सीखा है.