//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:05:05,00:00:08:20, हमारी दृष्टि क्षमता को हमारे पूर्वजों की कल्पना से कहीं परे ले जाकर चमत्कारी दूरबीनों 00:00:08:21,00:00:13:05, ने प्रकृति की गहराई और पूर्णता से समझने 00:00:13:06,00:00:17:06, का मार्ग प्रशस्त किया है - रेने डिकार्टीज़, 1637। 00:00:17:17,00:00:22:13, लाखों वर्षों से मानव तारक खचित आकाश देख मुग्ध होता रहा 00:00:22:14,00:00:28:08, - इस बात से अनजान कि ये तारे सूर्य जैसे हैं और आकाश गंगा मन्दाकिनी के सदस्य हैं 00:00:28:09,00:00:33:10, - खरबों दूसरी मन्दाकिनियाँ ब्रह्माण्ड में बिखरी पड़ी हैं 00:00:35:10,00:00:38:19, - जिसमें हमारा आस्तित्व 13.7 खरब वर्ष के काल 00:00:38:20,00:00:42:12, में मात्र विराम चिह्न से अधिक नहीं। 00:00:42:13,00:00:46:02, केवल कोरी आँखों से देखकर अन्य तारों के गिर्द दूसरे सौरमण्डल या 00:00:46:03,00:00:50:03, अन्य तारों के गिर्द दूसरे सौरमण्डल या 00:00:50:04,00:00:55:00, धरातीत जीवन की खोज नहीं की जा सकती। 00:00:58:01,00:01:00:08, आज हम एक विलक्षण युग में जी रहे हैं 00:01:00:09,00:01:03:13, जिसमें ब्रह्माण्ड के नित नये रहस्यों पर 00:01:03:14,00:01:05:23, से पर्दा उठना शुरु हुआ है। 00:01:05:24,00:01:08:24, मैं हूँ डा॰ "जे" और मैं आपको 00:01:09:00,00:01:11:21, दूरबीन के बारे में बताऊँगा जो मानव के लिये 00:01:11:22,00:01:15:12, ब्रह्माण्ड का प्रवेशद्वार सिद्ध हुई। 00:01:17:22,00:01:21:21, "आकाश पर गढ़ी नजरें" दूरबीन के आविष्कार के 400 साल। 00:01:22:03,00:01:26:23, 1. एक नव आकाश। 00:01:28:24,00:01:32:03, चार शताब्दि पहले एक व्यक्ति अपने घर के 00:01:32:04,00:01:34:15, निकट मैदान में आया। 00:01:34:16,00:01:39:00, उसने स्वनिर्मित दूरबीन ऊपर चन्द्रमा, ग्रहों और तारों पर तानी। 00:01:39:01,00:01:42:14, उसका नाम था गैलीलियो गैलिली। 00:01:44:00,00:01:47:07, तब से फिर खगोलशास्त्र ने पीछे मुड़कर न देखा। 00:02:07:10,00:02:12:10, उस घटना के चार सौ साल बाद आज 00:02:12:14,00:02:18:07, खगोलशास्त्री शिखरों पर स्थित वेधशालाओं की दूरबीनों से जिनमें विशाल दर्पण लगे होते हैं आकाश निहारते हैं। 00:02:18:08,00:02:23:12, उनकी रेडियो दूरबीनें बाह्य अन्तरिक्ष में जरा सी भी आहट सुनने के लिये सजग रहती हैं। 00:02:23:13,00:02:27:16, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की कक्षा में, वायुमण्डल की 00:02:27:17,00:02:31:23, बाधाओं से परे दूरबीनें स्थापित की हैं। 00:02:33:10,00:02:38:16, जो देखा उसने मन्त्रमुग्ध किया! 00:02:42:23,00:02:46:15, सच ये है गैलीलियो ने दूरबीन का अविष्कार नहीं किया। 00:02:46:16,00:02:49:18, इसका श्रेय जाता है हालैण्ड के और जर्मन मूल के 00:02:49:19,00:02:53:10, चश्मा बनाने वाले अचर्चित हैन्स लिपरशे को। 00:02:53:11,00:02:57:21, पर हैन्स लिपरशे ने कभी अपनी दूरबीन का उपयोग तारों को देखने के लिये नहीं किया 00:02:57:22,00:03:00:20, बल्कि उनका ख्याल था कि यह आविष्कार नाविकों और सिपाहियों के काम आयेगा। 00:03:00:21,00:03:03:15, नाविकों और सिपाहियों के काम आयेगा। 00:03:03:18,00:03:07:06, लिपरशे थे नवोदित डच गणराज्य के मिडेलबर्ग 00:03:07:07,00:03:10:11, नामक वाणिज्यिक शहर से। 00:03:13:24,00:03:18:01, सन् 1608 में लिपरशे ने देखा कि एक 00:03:18:02,00:03:24:00, उन्नत व अवनत ताल (लैन्स) के द्वारा कोई दूर स्थित वस्तु बड़ी 00:03:24:01,00:03:29:15, दिखाई देती है बशर्ते इन तालों को परस्पर सही दूरी पर रखा जाय। 00:03:29:16,00:03:33:19, यही था दूरबीन का जन्म। 00:03:33:20,00:03:37:12, सितंबर 1608 में उन्होने अपने आविष्कार की बात 00:03:37:13,00:03:39:21, हाँलैन्ड के राजकुमार मॉरिट्स को बताई। 00:03:39:22,00:03:42:20, समय बड़ा उपयुक्त था 00:03:42:21,00:03:45:21, क्योंकि तब हालैण्ड, 00:03:45:22,00:03:49:08, स्पेन के साथ 80 वर्ष लम्बे युद्ध में उलझा था। 00:03:55:07,00:03:59:02, इस खोज जिसे जासूसी शीशा (स्पाईग्लास) कहा जाता था से 00:03:59:03,00:04:02:07, बहुत दूर से शत्रु की सेना जहाज़ 00:04:02:08,00:04:04:09, आदि दिखाई दे जाते थे। 00:04:04:10,00:04:07:11, खोज पर सफलता की मुहर लग गयी। 00:04:07:12,00:04:12:00, पर डच सरकार लिपरशे को पेटेण्ट प्रदान न कर सकी - 00:04:12:01,00:04:15:10, क्योंकि कुछ अन्य लोग इसका श्रेय ले रहे थे, 00:04:15:11,00:04:19:05, विशेषकर लिपरशे का प्रतिद्वन्द्वी - सचारियास जैन्सन। 00:04:19:06,00:04:21:12, विवाद कभी सुलझ न पाया। 00:04:21:13,00:04:27:22, और आज तक दूरबीन के जन्म की सही कहानी से हम अनजान हैं। 00:04:28:21,00:04:32:17, इतालवी खगोलशास्त्री गैलीलियो ने, जिन्हें आधुनिक भौतिकी का जन्मदाता कहा जाता है, 00:04:32:18,00:04:37:15, दूरबीन के बारे में सुना और स्वयं अपनी दूरबीन बनाने की ठानी। 00:04:38:07,00:04:42:09, करीब दस महीने पहले यह सुनने में आया कि अमुक 00:04:42:10,00:04:48:05, फ्लैमिंग ने ऐसा जासूसी चश्मा बना लिया है जिससे 00:04:48:06,00:04:52:24, दूर की वस्तुएँ एकदम पास नजर आती हैं। 00:04:53:00,00:04:56:03, 00:04:56:11,00:04:59:11, गैलीलियो अपने समय के महानतम वैज्ञानिक थे। 00:04:59:12,00:05:02:14, वो पोलैण्ड के निकोलस कोपरनिकस के प्रबल समर्थक थे 00:05:02:15,00:05:06:04, जिसने यह सिद्धांत दिया था कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है 00:05:06:05,00:05:10:11, न कि सूर्य पृ्थ्वी की। 00:05:11:12,00:05:14:06, डच दूरबीन के बारे में जो सुना था उससे 00:05:14:07,00:05:16:14, गैलीलियो ने खुद एक दूरबीन बना ली 00:05:16:15,00:05:19:04, जो अधिक बेहतर थी। 00:05:20:12,00:05:25:08, "अंतत: श्रम और धन की परवाह किये बिना मैंने ऐसी 00:05:25:09,00:05:29:16, सुग्राही दूरबीन बना ली है जो कोरी आँखों की तुलना में 00:05:29:17,00:05:33:22, वस्तुओं की हजार गुना आवर्धित कर देती है। 00:05:33:23,00:05:38:20, 00:05:39:16,00:05:43:15, यह सही समय था दूरबीन को आकाश पर तानने का। 00:05:45:21,00:05:49:16, मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि चाँद की सतह 00:05:49:18,00:05:53:12, किसी चिकने गोले जैसी नहीं है जैसा बहुत से दार्शनिक 00:05:53:17,00:05:57:11, मानते आ रहे हैं - 00:05:57:12,00:06:01:17, बल्कि ऊबड़-खाबड़ है और उसमें 00:06:01:18,00:06:06:06, पृथ्वी से बहुत साम्य है। 00:06:11:14,00:06:15:08, चाँद पर हैं गड्ढे, पर्वत और घाटियाँ - 00:06:15:09,00:06:18:08, हमारे जैसा एक संसार। 00:06:19:13,00:06:24:01, कुछ सप्ताह बाद जनवरी 1610 में गैलीलियो ने गुरु को दूरबीन से देखा। 00:06:24:02,00:06:28:14, ग्रह से सटे उन्हें चार प्रकाश बिन्दु दिखाई दिये 00:06:28:16,00:06:32:24, जो रात-प्रतिरात गुरु के पास ही दिखाई देते और अपना स्थान बदलते रहते। 00:06:33:00,00:06:37:22, ऐसा लगा वे प्रकाश बिन्दु हमें ब्रह्माण्ड का कोई नृत्य दिखा रहे हों। 00:06:37:23,00:06:40:18, बाद में वे गुरु के चार गैलीलियन उपग्रह कहलाये। 00:06:40:19,00:06:43:14, 00:06:43:16,00:06:46:06, और क्या खोजा गैलीलियो ने? 00:06:46:07,00:06:48:10, शुक्र की कलायें। 00:06:48:12,00:06:51:22, ठीक हमारे चन्द्रमा की तरह 00:06:51:24,00:06:54:05, शुक्र भी कलायें दिखाता है। 00:06:54:06,00:06:58:14, शनि ग्रह के दोनों तरफ उन्हें कान जैसी रचना दिखाई दी। 00:06:58:15,00:07:01:04, सूर्य के चेहरे पर काले दाग। 00:07:01:06,00:07:03:11, और हाँ तारे - वो भी ढेर सारे - 00:07:03:12,00:07:06:10, लाखों की संख्या में 00:07:06:11,00:07:09:08, जो कोरी आँखों के परे थे। 00:07:09:10,00:07:13:22, ऐसा लगा मानो मानव ने अपनी आँखों पर लगी पट्टी एक झटके में निकाल फेंकी हो। 00:07:13:24,00:07:18:00, सामने विराट ब्रह्माण्ड पुकार रहा था - आओ मुझे खोजो, जानो। 00:07:23:10,00:07:27:18, दूरबीन की खबर पूरे यूरोप में आग की तरह फैल गयी। 00:07:27:20,00:07:32:02, प्राग में रुडोल्फ द्वितीय के दरबार में जोहान्स कैप्लर 00:07:32:04,00:07:34:19, ने दूरबीन में और सुधार किये। 00:07:34:20,00:07:38:20, एण्टवर्प में नक्शा निर्माता माइकेल फॉन लैन्ग्रेन ने 00:07:38:22,00:07:41:22, पहली बार चाँद के नक्शे बनाये 00:07:41:24,00:07:44:10, और उनमें महाद्वीप और महासागर दरशाये। 00:07:44:12,00:07:49:16, और पोलैण्ड में - पेशे से शराब निर्माता - धनी - जोहान्स हैवेलियस ने 00:07:49:17,00:07:53:05, डैन्जिग स्थित अपनी वेधशाला में विशाल दूरबीनें लगाईं। 00:07:53:06,00:07:57:21, वेधशाला इतनी बड़ी थी कि यह तीन मकानों की छतों पर फैली थी। 00:07:59:04,00:08:02:06, पर शायद उस समय के सबसे अच्छे उपकरण 00:08:02:07,00:08:05:09, नीदरलैण्डस् में क्रिश्चियन हाइगेन्स ने बनाये थे। 00:08:05:10,00:08:11:02, सन 1655 में हाइगेन्स ने शनि के सबसे बड़े उपग्रह टाइटन को खोजा। 00:08:11:03,00:08:15:04, कुछ वर्ष बाद उन्होने शनि के वलय पहचान लिये 00:08:15:05,00:08:20:08, जिसमें गैलीलियो धोका खा चुके थे। 00:08:20:09,00:08:24:15, यही नहीं, हाइगेन्स ने मंगल ग्रह पर 00:08:24:16,00:08:27:09, काली रेखाओं और उसकी ध्रुवीय टोपियों को भी पहचाना था। 00:08:27:10,00:08:31:02, क्या मंगल के इस संसार में जीवन हो सकता है? 00:08:31:03,00:08:35:06, आज भी यह एक प्रश्न ही है। 00:08:35:20,00:08:39:12, आरम्भ मे दूरबीनों में प्रकाश इकट्ठा करने का काम ताल (या लैन्स) 00:08:39:13,00:08:42:16, द्वारा किया जाता था - ये अपवर्तक थे। 00:08:42:17,00:08:45:11, बाद में यह काम दर्पणों द्वारा किया जाने लगा। 00:08:45:12,00:08:49:02, प्रथम परावर्तक दूरबीन निकोलो जुच्ची ने बनाई 00:08:49:03,00:08:52:00, और बाद में न्यूटन ने उसमें सुधार किये। 00:08:52:01,00:08:55:18, फिर 18वीं सदी के अन्त में विलियम हर्शल ने विशाल परावर्तक बनाने आरम्भ किये। 00:08:55:19,00:08:59:14, हर्शल वाद्य यंत्र वादक से खगोलशास्त्री बने थे 00:08:59:15,00:09:02:12, और अपनी बहिन कैरोलाइन के साथ काम करते थे। 00:09:02:13,00:09:06:05, इंगलैण्ड के बाथ नाम शहर के आवास में भाई बहिन गर्म पिंघले शीशे 00:09:06:06,00:09:09:21, को साँचो में ढालते, ठण्डा करते, 00:09:09:22,00:09:15:11, सतह को चमकाते ताकि वो तारों को परावर्तित कर सके। 00:09:15:12,00:09:20:08, इस प्रकार अपने जीवनकाल में उन्होंने 400 से अधिक दूरबीनें बना डाली। 00:09:24:11,00:09:28:09, इनमें से जो सबसे विशाल थी उसे घुमाने के लिये उसकी रस्सियाँ, पहिये 00:09:28:10,00:09:31:14, और चक्के घुमाने के लिये चार सहायक लगते थे। 00:09:31:15,00:09:36:00, पृथ्वी के घूमने के कारण तारे घूम जाते हैं 00:09:36:01,00:09:39:11, इसलिये दूरबीन भी घुमानी पड़ती है। 00:09:39:12,00:09:43:02, हर्शल एक सर्वेक्षक बन चुके थे, उन्होने आकाश 00:09:43:03,00:09:46:17, को खंगाला और सैकड़ों नयी नीहारिकाओं, तारक युग्मों को देखा और दर्ज किया। 00:09:46:18,00:09:50:07, उन्होंने ये भी खोज लिया कि आकाशगंगा एक चपटी चकती जैसी होनी चाहिये। 00:09:50:08,00:09:54:03, उन्होंने यह भी गणना की कि सौरमण्डल उस चकती में किस गति से घूम रहा है 00:09:54:04,00:09:58:20, - तारों और ग्रहों की सापेक्ष गति का अध्ययन कर। 00:09:58:21,00:10:06:09, और फिर आई 13 मार्च 1781 की तारीख। उन्होने एक नया ग्रह - यूरेनस खोजा। 00:10:06:10,00:10:10:16, इस घटना के 200 साल बाद जाकर नासा के वोयेजर-2 अभियान द्वारा 00:10:10:17,00:10:15:21, पहली बार इस ग्रह के समीप से दर्शन हुए। 00:10:16:18,00:10:21:06, आयरलैण्ड की हरी-भरी उर्वर भूमि पर 13वीं शताब्दि की सबसे बड़ी दूरबीन बनी - निर्माता - विलियम पार्सन्स 00:10:21:07,00:10:26:13, तीसरे "अर्ल आँफ रौस"। दर्पण विशाल था 00:10:26:14,00:10:30:13, - 1.8 मीटर व्यास का - 00:10:30:14,00:10:35:06, लोग इसे "पार्सन्सटाउन का दैत्य" कहने लगे। 00:10:35:07,00:10:39:08, कभी कभार चन्द्रमा विहीन निर्मल रात्रि में अर्ल महाशय 00:10:39:10,00:10:44:10, दृष्टि फलक (आयपीस) पर आँख गढ़ा कर चल निकलते महविश्व की यात्रा पर। 00:10:45:06,00:10:50:04, वे ओरायन नैब्युला (मृग नीहारिका) पहुँच जाते जिसे आज हम तारों की पौधशाला मानते हैं। 00:10:50:06,00:10:55:22, तो कभी कर्क नीहारिका जा पहुँचते जो सुपरनोवा विस्फोट का अवशेष है। 00:10:55:23,00:10:57:22, तो कभी भँवररुपी मन्दाकिनी (व्हर्लपूल नैब्युला) देखते। 00:10:57:23,00:11:02:13, लॉर्ड रौस वे पहले व्यक्ति थे जिसने इसकी वलयाकार भुजायें पहचानीं। 00:11:02:14,00:11:08:10, हमारी आकाशगंगा जैसी ही अन्य मन्दाकिनी, 00:11:08:11,00:11:12:10, चमकती गैस, उसमें धूल की काली रेखायें, खरबों तारे - 00:11:12:11,00:11:16:13, और शायद कौन जाने पृथ्वियाँ भी हों। 00:11:18:21,00:11:24:22, दूरबीन सचमुच ऐसा जहाज़ बन गयी है जिसके सहारे हम ब्रह्माण्ड की यात्रा पर निकल पड़े हैं।