//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:00:10,00:00:04:20, 2. जितनी बड़ी उतनी बेहतर 00:00:06:18,00:00:09:04, रात में हमारी आँखें अंधेरे की अभ्यस्त हो जाती हैं 00:00:09:05,00:00:13:08, - पुतली चौड़ी होकर अधिक प्रकाश का ग्रहण करती है। 00:00:13:09,00:00:18:14, इस प्रकार हम धुँधली वस्तुऐं और तारे देख पाते हैं। 00:00:18:15,00:00:22:10, कल्पना करें कि आपकी पुतली का व्यास एक मीटर का हो गया है। 00:00:22:11,00:00:26:16, आप अजीब दिखाई देंगे पर विलक्षण दृष्टि क्षमता हो जायेगी आपकी। 00:00:26:17,00:00:30:03, बस यही काम दूरबीन करती है। 00:00:32:14,00:00:35:08, मानो वह एक "कीप" या फनल है। 00:00:35:09,00:00:40:23, इसका मुख्य लैन्स या दर्पण प्रकाश को इकट्ठाकर आपकी आँख पर केन्द्रित करता है। 00:00:43:18,00:00:48:12, जितना बड़ा यह लैन्स या दर्पण होगा उतना ही अधिक मन्द आप देख पायेंगे। 00:00:48:13,00:00:51:10, यानि आकार महान है। 00:00:51:11,00:00:54:02, तो फिर कितनी बड़ी दूरबीन हम बना सकते हैं? 00:00:54:03,00:00:57:03, यदि अपवर्तक हो तो कुछ ज़्यादा नहीं कर सकते। 00:01:00:03,00:01:03:10, प्रकाश इसके लैन्स से गुजरता है। 00:01:03:11,00:01:06:19, आप इसे केवल परिधि से पकड़ सकते हैं। 00:01:06:20,00:01:12:15, बड़ा बनायें तो यह अपने ही भार से विकृत होने लगता है। 00:01:12:16,00:01:16:08, इससे बिम्ब में भी विकृति आती है। 00:01:18:01,00:01:25:01, इतिहास में सबसे बड़ी दूरबीन 1897 में पूरी की गयी, इसे शिकागो के बाहर यर्कीज़ आब्ज़र्वेटरी में स्थापित किया गया। 00:01:25:02,00:01:28:05, इसका मुख्य ताल एक मीटर जितना था। 00:01:28:06,00:01:32:20, पर इसकी नली, अविश्वसनीय, 18 मीटर लम्बी हो गयी थी। 00:01:32:21,00:01:39:10, यर्कीज़ दूरबीन के साथ बड़ी अपवर्तक अपने आकार की ऊपरी सीमा छूँ चुकी थी। 00:01:39:11,00:01:41:14, यदि बड़ी दूरबीनें चाहिये 00:01:41:15,00:01:43:13, तो दर्पण के बारे में सोचें। 00:01:47:18,00:01:53:19, एक परावर्तक दूरबीन में प्रकाश दर्पण से टकराकर लौटता है, उसे किसी काँच जैसे माध्यम से नहीं गुजरना पड़ता। 00:01:53:20,00:02:00:03, इसका अर्थ है आप लैन्स की तुलना में दर्पण पतले कर सकते हैं और उन्हें पीछे से सहारा भी दे सकते हैं। 00:02:00:04,00:02:05:08, परिणामत: लैन्स की तुलना में बहुत विशाल दर्पण बनाना सम्भव है। 00:02:06:07,00:02:10:10, एक शताब्दि पहले कैलिफोर्निया में बड़े दर्पणों का पदार्पण हुआ। 00:02:10:11,00:02:15:15, तब सैन गैब्रिएल पर्वत श्रृंखला में माउण्ट विल्सन एक अलग-थलग शिखर था। 00:02:15:16,00:02:19:20, वहाँ आकाश निर्मल रहता और शहरों से दूर रात्रि अंधकार पूर्ण होती। 00:02:19:21,00:02:24:09, यहाँ जार्ज एलेरी हेल ने पहले एक ड़ेढ मीटर व्यास की दूरबीन बनायी। 00:02:24:10,00:02:29:02, ये लॉर्ड रौस की सेवानिवृत्त दूरबीन से छोटी किन्तु अधिक गुणवत्ता की थी। 00:02:29:03,00:02:32:22, स्थापन स्थल भी बेहतर था। 00:02:32:23,00:02:38:09, हेल ने एक स्थानीय व्यापारी जॉन हुकर से ढाई मीटर व्यास की दूरबीन के लिये अर्थदान हासिल किया। 00:02:38:10,00:02:43:06, फिर टनों काँच, स्टील की पट्टियाँ माउण्ट विल्सन पर चढाई गयीं, 00:02:43:07,00:02:46:18, सन 1917 में हुकर दूरबीन सम्पन्न हुई और 00:02:46:19,00:02:50:24, अगले तीस वर्षों तक दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन बनी रही। 00:02:51:00,00:02:56:03, मानो ये थी एक विशाल तोप जो ब्रह्माण्ड पर आक्रमण करने को तत्पर थी। 00:02:59:04,00:03:01:20, उसने आक्रमण किया भी! 00:03:01:21,00:03:04:23, विराट आकार के साथ दूरबीन से देखने, 00:03:04:24,00:03:07:23, प्रेक्षण लेने की तकनीक भी बदली। 00:03:07:24,00:03:11:12, अब लगातार नेत्रफलक (आईपीस) में ताकना आवश्यक न रह गया था। 00:03:11:13,00:03:16:16, प्रकाश को फोटोग्राफिक प्लेट पर घण्टों तक अंकित किया जाने लगा। 00:03:16:17,00:03:21:13, आजतक कोई ब्रह्माण्ड में कोई इतनी गहराई तक नहीं पैठ पाया था। 00:03:21:14,00:03:25:21, वलयाकार भुजाओं वाली नीहारिकायें तारों के विशाल समुदाय निकले, 00:03:25:22,00:03:30:07, शायद उनमें भी हमारी आकाशगंगा की तरह तारे फैले हों। 00:03:30:08,00:03:34:12, देवयानी मन्दाकिनी में एडविन हबल ने एक अनोखा तारा पाया 00:03:34:13,00:03:38:02, जिसकी चमक चक्रीय क्रम में घटती बढ़ती थी। 00:03:38:03,00:03:42:11, हबल के प्रेक्षणों से इस प्रकार देवयानी मन्दाकिनी की दूरी ज्ञात हो गयी 00:03:42:12,00:03:46:17, लगभग 10 लाख प्रकाश वर्ष। 00:03:46:18,00:03:53:11, देवयानी की ही तरह अन्य वलयाकार नीहारिकायें भी स्वयम में मन्दाकिनियाँ निकल आँयीं। 00:03:55:03,00:03:58:01, केवल यही एकमात्र चौंकाने वाली बात हो ऐसा न था। 00:03:58:02,00:04:02:18, देखा गया कि ये सब मन्दाकिनियाँ आकाश गंगा से दूर भाग रहीं थीं। 00:04:02:19,00:04:08:08, माउण्ट विल्सन से प्रेक्षण लेते हुए हबल ने पाया कि पासवाली कम 00:04:08:09,00:04:13:05, और दूरवाली मन्दाकिनियाँ अधिक गति से पलायन कर रही थीं। 00:04:13:06,00:04:14:11, निष्कर्ष? 00:04:14:12,00:04:17:06, ब्रह्माण्ड फैल रहा था। 00:04:17:07,00:04:24:03, इस प्रकार हुकर दूरबीन ने खगोलशास्त्रीयों को बीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण खोज प्रदान की। 00:04:26:19,00:04:31:08, इस दूरबीन का धन्यवाद कि हम ब्रह्माण्ड के इतिहास में झाँक सके। 00:04:31:09,00:04:35:15, लगभग 14 अरब वर्ष पहले एक दिक्काल, 00:04:35:16,00:04:39:23, ऊर्जा एवम् पदार्थ के प्रचण्ड विस्फोट - "बिग बैंग" 00:04:39:24,00:04:42:07, द्वारा ब्रह्माण्ड अस्तित्व में आया। 00:04:42:08,00:04:48:04, आदि पदार्थ में उठी लघुतरंगें सघन बादल बनने लगीं। 00:04:48:05,00:04:50:22, फिर इनसे मन्दाकिनियाँ जन्मीं। 00:04:50:23,00:04:54:13, नाना आकार व स्वरुप वाली। 00:04:57:06,00:05:01:03, तारों की क्रोड़ में नाभिकीय संलयन द्वारा नये परमाणु बने। 00:05:01:04,00:05:05:14, कार्बन, आक्सीजन, लोहा, सोना इत्यादि। 00:05:05:15,00:05:10:08, फिर सुपरनोवा विस्फोट द्वारा ये परमाणु वापस अंतरिक्ष में व्याप्त हो गये। 00:05:10:09,00:05:13:20, ये थी नये तारों 00:05:13:21,00:05:15:13, और ग्रहों की निर्माण सामग्री। 00:05:17:13,00:05:25:15, और फिर कहीं, किसी दिन सरल कार्बनिक यौगिक सरल जीवधारियों में तब्दील हो गये। 00:05:25:16,00:05:31:07, ब्रह्माण्ड में जीवन की उत्पत्ति एक आश्चर्य से कम नहीं। 00:05:31:08,00:05:33:15, हम स्वयम् तारों के अंश हैं। 00:05:33:16,00:05:37:18, यह बृहत् परिदृश्य और ये रोचक कहानी 00:05:37:19,00:05:41:22, दूरबीनों ने उजागर की है। 00:05:41:23,00:05:46:09, यदि दूरबीन न आयी होती तो आज भी हम 00:05:46:10,00:05:48:22, केवल 6 ग्रहों, एक चन्द्रमा और कुछ हजार तारों की ही बात कर रहे होते। 00:05:48:23,00:05:53:03, आज भी खगोलशास्त्र अपने शैशव में ही होता। 00:05:54:08,00:05:58:04, मानो अपने में गढ़े हुये किसी खजाने 00:05:58:05,00:06:00:18, की खोज के लिये हमें आमन्त्रित कर रहा हो। 00:06:00:19,00:06:06:04, राजकुमारों, सामंतो, राजनेताओं, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों 00:06:06:05,00:06:10:23, सभी की अनजान ब्रह्माण्ड को जानने की चाहत रही। 00:06:10:24,00:06:16:03, उनके द्वारा प्रदत्त उपकरणों ने हमारे ज्ञान की परिघि को तेजी़ से आगे बढा़या। 00:06:30:11,00:06:33:09, जॉर्ज एलरी हेल का एक अन्तिम स्वप्न थाः 00:06:33:10,00:06:37:16, पहले से दोगुनी क्षमता की दूरबीन बनाना। 00:06:37:17,00:06:41:15, मिलिये बीसवीं सदी की पैलोमर पर्वत शिखर 00:06:41:16,00:06:46:15, पर स्थित पाँच मीटर व्यास की हेल दूरबीन से। 00:06:46:16,00:06:51:06, पाँच सौ टन से अधिक भारवाली यह दूरबीन 00:06:51:07,00:06:55:09, एक बैले नर्तकी सा संतुलन बना थिरकती है। 00:06:55:10,00:07:00:23, इसका 40 टन का दर्पण कोरी आँखों की क्षमता से चार करोड़ गुना धुँधले तारे दर्शाता है। 00:07:00:24,00:07:05:23, सन 1948 में पूर्ण हुई इस दूरबीन ने हमें ग्रहों, 00:07:05:24,00:07:09:13, तारक समूहों, नीहारिकाओं और मन्दाकिनियों के विलक्षण दृष्य दिखाये हैं। 00:07:11:18,00:07:15:17, विराट गुरु ग्रह अपने चन्द्रमाओं के साथ। 00:07:15:18,00:07:19:19, अद्भुत अग्निशिखा नीहारिका। 00:07:19:20,00:07:24:23, मृग नीहारिका में गैस की लटें। 00:07:30:13,00:07:32:20, क्या हम और बड़ी दूरबीनें बना सकते हैं? 00:07:32:21,00:07:36:23, सन् 1970 में रूसी खगोलशास्त्रियों ने ये कोशिश की थी। 00:07:36:24,00:07:41:08, कॉकेशस पर्वत श्रृंखला में एक ऊँचे स्थान में उन्होंने 6 मीटर व्यास वाले दर्पण की 00:07:41:09,00:07:45:15, बोलशोई अजीमुताल्न्यी टैलिस्कोप लगाई। 00:07:45:16,00:07:48:08, पर यह आशा पर ख़री न उतर सकी। 00:07:48:09,00:07:52:11, कारण, यह बहुत बड़ी, बहुत खर्चीली और बहुत कठिन साबित हुई। 00:07:52:12,00:07:55:17, क्या ये प्रयास बन्द होने चाहिये? 00:07:55:18,00:07:59:05, क्या बड़ी दूरबीनों के स्वप्न सँजोना वृथा है? 00:07:59:06,00:08:02:17, क्या बड़ी दूरबीन के निर्माण की कहानी का पटाक्षेप हो गया था? 00:08:02:18,00:08:04:02, हरगिज नहीं। 00:08:04:03,00:08:07:05, आज विश्व में दस मीटर व्यास की दूरबीनें कार्यरत हैं। 00:08:07:06,00:08:09:21, और भी बड़ी दूरबीनों के निर्माण की योजनायें हैं। 00:08:09:22,00:08:11:10, कैसे ये सम्भव हुआ? 00:08:11:11,00:08:13:08, नयी तकनीकों द्वारा।