//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:00:00,00:00:04:19, 3. उद्धार किया तकनीकी ने 00:00:04:25,00:00:08:20, ठीक जिस तरह आधुनिक कारें फोर्ड के प्रथम मॉडल से पर्याप्त भिन्न हैं 00:00:08:21,00:00:12:07, वैसे ही आधुनिक दूरबीनें अपने पुरातन स्वरुप से अलग नज़र आती हैं। 00:00:12:08,00:00:14:17, जैसे पाँच मीटर की हेल दूरबीन। 00:00:14:18,00:00:17:22, पहली बात, उन्हें आधार देने वाली प्रणाली छोटी हो गयी है। 00:00:17:23,00:00:21:21, पहले की ध्रुवीय शैली में दूरबीन का 00:00:21:22,00:00:25:18, एक अक्ष पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के समान्तर रखा जाता था। 00:00:25:19,00:00:29:12, आकाशीय पिण्डों का अनुसरण करने के लिये 00:00:29:13,00:00:34:05, दूरबीन को बस इस अक्ष पर घूमना होता था। 00:00:34:06,00:00:37:04, सरल। किन्तु बहुत स्थान घेरती थी। 00:00:37:05,00:00:42:01, आधुनिक उन्नतांश-समतलांश आधारित प्रणाली की दूरबीनें बहुत सुगठित होती हैं। 00:00:42:02,00:00:46:11, इसमें दूरबीन एक तोप की तरह आरुढ़ रहती है। 00:00:46:12,00:00:51:06, क्षैतिज तथा ऊपर - नीचे दो दिशाओं में घूम सकती है। 00:00:51:07,00:00:54:16, समस्या आती है आकाश का अनुसरण करने में। 00:00:54:17,00:01:00:06, इसके लिये दूरबीन को दोनों अक्षों पर भिन्न गतियों से घूमना पड़ता है। 00:01:00:07,00:01:06:18, यह पद्धति ठीक से तब कारगर हुयी जब दूरबीनें कम्प्यूटर- नियंत्रित हो गयीं। 00:01:06:19,00:01:08:21, इससे कुल प्रणाली छोटी और सस्ती हो गयी। 00:01:08:22,00:01:13:13, इसे छोटे गुम्बद में रखना सम्भव हुआ। 00:01:13:14,00:01:16:08, इससे लागत और घट गयी साथ ही बिम्ब की श्रेष्ठता बढ़ी। 00:01:16:09,00:01:19:20, उदाहरण के लिये हवाई द्वीप में लगी कैक दूरबीनें। 00:01:19:21,00:01:22:15, हाँलांकि दस मीटर व्यास के इसके दर्पण 00:01:22:16,00:01:26:11, माउण्ट पैलोमर की हेल दूरबीन से दुगने आकार के हैं 00:01:26:12,00:01:29:06, परन्तु ये कहीं छोटे गुम्बदों में समा सके हैं। 00:01:31:01,00:01:33:11, दूरबीन के दर्पण में भी सुधार आया है। 00:01:33:12,00:01:35:03, पहले वे मोटे और भारी होते थे। 00:01:35:04,00:01:37:21, अब पतले और हल्के। 00:01:37:22,00:01:42:20, दर्पण को रखने वाले खोल इन घूमती भट्टियों में ढाले जा रहे हैं। 00:01:42:21,00:01:46:08, ये 20 सेण्टीमीटर से भी पतले हैं। 00:01:46:09,00:01:48:25, एक जटिल आधार प्रणाली विशाल दर्पण को 00:01:49:01,00:01:51:05, अपने ही भार से तड़कने से बचाती है। 00:01:51:06,00:01:55:03, कम्प्यूटर नियंत्रित पिस्टन, दर्पण 00:01:55:04,00:01:56:21, के सही आकार को बनाये रखते हैं। 00:01:59:09,00:02:01:13, इस प्रणाली को "एक्टिव आप्टिक्स" कहा जाता है। 00:02:01:14,00:02:05:21, इस तरह गुरुत्व, हवा, तापमान से 00:02:05:22,00:02:10:14, आने वाली विकृतियों का निराकरण किया जाता है। 00:02:10:15,00:02:14:06, पतले दर्पण का वज़न भी कम होता है। 00:02:14:07,00:02:17:11, इसका अर्थ है आधार देने वाली प्रणाली भी 00:02:17:13,00:02:19:11, छोटी और हल्की होगी। 00:02:19:12,00:02:21:14, साथ ही सस्ती भी! 00:02:21:15,00:02:24:09, ये है 3.8 मीटर व्यास की नयी तकनीक दूरबीन - 00:02:24:10,00:02:27:19, यूरोप में यह 1980 के दशक में बनायी गयी। 00:02:27:20,00:02:30:21, ये नयी तकनीकों के परीक्षण 00:02:30:22,00:02:32:03, के लिये कसौटी साबित हुई। 00:02:32:04,00:02:36:25, इसका यह कक्ष भी पुरानी दूरबीनों के गुम्बदों से भिन्न है। 00:02:37:01,00:02:40:06, नयी तकनीक दूरबीन बहुत सफल सिद्ध हुयी। 00:02:40:07,00:02:43:07, आइये, 6 मीटर की बाधा पर करें। 00:02:43:14,00:02:47:10, प्रशान्त महासागर में 4200 मीटर के सर्वोच्च शिखर पर 00:02:47:11,00:02:50:24, ये है मौना कीया वेधशाला। 00:02:52:24,00:02:57:03, नीचे हवाई द्वीप के समुद्र तटों पर पर्यटक धूप और लहरों का आनन्द लेते हैं। 00:02:57:04,00:03:00:13, पर यहाँ ऊपर कड़क सर्दी और कम वायु दाब की विषम परिस्थिति झेलते हुए 00:03:00:14,00:03:07:04, खगोलशास्त्री ब्रह्माण्ड के रहस्यों की खोज में लगे रहते हैं। 00:03:07:05,00:03:10:03, कैक दूरबीनें दुनिया की विशालतम दूरबीनों में से हैं। 00:03:10:04,00:03:15:03, दस मीटर व्यास के इनके दर्पण पापड़ जैसे पतले हैं। 00:03:15:04,00:03:20:01, छत्तीस षट्कोणीय भागों को फर्श पर बिछी टाइलों की भाँति जोड़कर ये बने हैं - 00:03:20:02,00:03:23:12, प्रत्येक का नियंत्रण नैनोमीटर की शुद्धता से होता है। 00:03:23:13,00:03:27:05, ये महान दूरबीनें आकाश के अध्ययन को समर्पित हैं। 00:03:27:06,00:03:30:03, विज्ञान के मन्दिर। 00:03:30:04,00:03:32:15, मौना कीया में रात्रि का पदार्पण। 00:03:32:16,00:03:37:18, कैक दूरबीनें ब्रह्माण्ड के सुदूर कोनों से आयी प्रकाश रश्मियों का संग्रह आरम्भ कर देती हैं। 00:03:37:19,00:03:40:13, दो दूरबीनों के दर्पण संयुक्त रुप से दुनिया की 00:03:40:14,00:03:43:11, विशाल दूरबीनों को पिछाड़ देते हैं। 00:03:43:12,00:03:46:09, आज रात ये क्या नया खोजेंगी? 00:03:50:16,00:03:55:13, शायद अरबों प्रकाश वर्ष दूर परस्पर संघट्ट करती मन्दाकिनियों को? 00:03:55:14,00:04:01:08, या किसी मृत्युप्राप्त तारे की अन्तिम उच्छवास - ग्रहरुपी नीहारिका के रुप में? 00:04:01:09,00:04:07:01, या फिर कोई धरातीत ग्रह जिसमें जीवन पनप रहा हो? 00:04:07:02,00:04:11:23, विश्व के शुष्कतम् स्थल चिली के एटाकामा मरुस्थल 00:04:11:24,00:04:16:01, में सैरो पैरानल नामक स्थान में हमें खगोलशास्त्र की सबसे बड़ी मशीन के दर्शन होते हैं। 00:04:16:02,00:04:19:14, यूरोप की वैरी लार्ज टैलेस्कोप या वी॰एल॰टी॰। 00:04:32:04,00:04:35:13, इस एक दूरबीन में चार दूरबीनें समायी हैं। 00:04:35:14,00:04:38:19, प्रत्येक के दर्पण का व्यास 8.2 मीटर। 00:04:38:20,00:04:40:03, अंतू। 00:04:40:04,00:04:41:06, कुयैन। 00:04:41:07,00:04:42:08, मेलीपाल। 00:04:42:09,00:04:43:19, येपुन। 00:04:43:20,00:04:49:11, ये हैं स्थानीय मापुची सभ्यता में सूर्य, चन्द्र, त्रिशंकु और शुक्र के नाम। 00:04:49:12,00:04:53:20, ये विशाल दर्पण जर्मनी में ढले, फ्रांस में इन्हें चमकाकर चिली 00:04:53:21,00:04:57:06, के मरुस्थल को धीमी यात्रा पर भेज दिया गया। 00:04:57:07,00:05:00:24, रात होती है और दूरबीनों की छतरियां खुल जाती हैं। 00:05:01:00,00:05:04:14, तारों के प्रकाश की वृष्टि वी॰एल॰टी॰ के दर्पणों पर होने लगती है। 00:05:05:06,00:05:08:02, नई खोजें होती हैं। 00:05:11:22,00:05:14:04, एक लेज़र रश्मि रात्रि आकाश को चीरती है। 00:05:14:05,00:05:16:17, हमारे सिर के 90 किमी॰ ऊपर 00:05:16:18,00:05:19:21, एक कृत्रिम तारे का निर्माण करती है। 00:05:19:22,00:05:22:23, दूरबीन के सुग्राही संवेदक यंत्र ये मापते हैं कि 00:05:22:24,00:05:25:03, वायुमण्डल की हलचल इस तारे के बिम्ब को कितना विकृत करती है। 00:05:25:04,00:05:28:24, तुरंत तेज कम्प्यूटर गणना कर दूरबीन के लचीले दर्पण को 00:05:29:00,00:05:31:20, बताते हैं कि कहाँ कितने विकृत हो जाओ कि तारे की विकृति खत्म हो जाय। 00:05:31:21,00:05:34:24, इस तरह तारों की टिमटिमाहट समाप्त की जाती है। 00:05:35:00,00:05:38:15, ये है "एडैप्टिव आप्टिक्स" नामक 00:05:38:16,00:05:40:08, आधुनिक तकनीकी जादू। 00:05:40:09,00:05:44:21, बिना इस के ब्रह्माण्ड का परिदृश्य हमें धुँधला और अस्पष्ट नजर आता। 00:05:44:22,00:05:48:22, पर इस के कारण अब बिम्ब एकदम स्पष्ट हैं। 00:05:51:11,00:05:55:12, एक अन्य आधुनिक जादू है व्यतिकरण का। 00:05:55:13,00:05:59:09, इसके द्वारा दो अलग-अलग दूरबीनों के प्रकाश को 00:05:59:10,00:06:02:16, एक स्थान पर कुछ इस तरह जोड़ा जाता है 00:06:02:17,00:06:05:08, 00:06:05:09,00:06:09:04, कि वे दो दूरबीनें ऐसा व्यवहार करने लगती हैं 00:06:09:05,00:06:12:15, मानो वो एक इतनी विशाल दूरबीन हो 00:06:12:16,00:06:15:23, जितना कि उनके बीच की दूरी। 00:06:15:24,00:06:20:01, इस तरह ये तकनीक दूरबीन को बाज जैसी पैनी दृष्टि प्रदान करती है। 00:06:20:02,00:06:23:15, इसके द्वारा छोटी दूरबीनों से भी इतनी सूक्ष्मता से देखना सम्भव हो पाया है 00:06:23:16,00:06:28:11, जो सामान्यतः कोई बहुत बड़ी दूरबीन ही कर सकती है। 00:06:28:12,00:06:31:15, मौना कीया पर स्थित दो कैक दूरबीनों को अक्सर इस कार्य के लिये 00:06:31:16,00:06:33:13, प्रयुक्त किया जाता है। 00:06:33:14,00:06:37:11, वी॰एल॰टी॰ में चारों दूरबीनें इस कार्य में लगायी जाती हैं। 00:06:37:12,00:06:40:19, बहुत सी छोटी दूरबीनों का योगदान भी 00:06:40:20,00:06:44:22, इसमें जुटाया जाता है। 00:06:45:20,00:06:49:10, दुनिया में जगह-जगह विशाल दूरबीनें स्थापित हैं। 00:06:49:11,00:06:53:12, मौना कीया में सुबारु और जैमिनी नॉर्थ। 00:06:53:13,00:06:58:06, चिली में जेमिनी साउथ और मैजेलन दूरबीनें। 00:06:58:07,00:07:02:07, एरिज़ोना में विशाल द्विचक्ष्वी दूरबीन। 00:07:04:04,00:07:06:20, इन्हें ऐसे बेहतर स्थानों पर लगाया गया है 00:07:06:20,00:07:09:18, जो ऊँचे, शुष्क, निर्मल और अन्धकार वाले हों। 00:07:09:20,00:07:12:16, उनकी आँखें किसी तरण-ताल जितनी बड़ी हैं। 00:07:12:18,00:07:16:10, इन सब में वो व्यवस्था है कि "एडैप्टिव आप्टिक्स" 00:07:16:10,00:07:18:02, वातावरण की झिलमिलाहट को कम करे 00:07:18:04,00:07:21:24, और व्यतिकरण वाली पद्धति का उपयोग कर उन्हें 00:07:22:00,00:07:24:16, किसी राक्षसी दृष्टि सा पैनापन मिल जाता है। 00:07:25:16,00:07:27:20, देखिये, उन्होंने हमें क्या दिखाया है? 00:07:27:22,00:07:29:10, ग्रह। 00:07:32:14,00:07:34:06, नीहारिकायें। 00:07:35:08,00:07:39:24, तारों के वास्तविक स्वरुप। 00:07:39:24,00:07:43:04, एक ठण्डा ग्रह भूरे वामन तारे की प्रदक्षिणा कर रहा है। 00:07:43:04,00:07:47:12, विशाल तारे आकाशगंगा के केन्द्र का चक्कर लगाते हुए 00:07:47:14,00:07:52:18, जिन्हें कोई विराट संहति का श्याम विवर (ब्लेक होल) अपने गुरुत्व से नियंत्रित कर रहा है। 00:07:52:20,00:07:56:10, क्यों है न? हम गैलीलियो के युग से बहुत आगे निकल आये हैं।