//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:00:00,00:00:04:19, 4. चाँदी से सिलीकॉन तक 00:00:05:20,00:00:09:00, 400 वर्ष पहले जब गैलीलियो ने दूसरों को वह दिखाना चाहा जो उन्होंने अपनी 00:00:09:02,00:00:13:00, दूरबीन से देखा था तो उन्हें रेखाचित्र बनाने पड़े। 00:00:13:02,00:00:16:06, गर्तों से पटा चन्द्रमा का मुखमण्डल। 00:00:16:08,00:00:20:10, गुरु के चन्द्रमाओं का नृत्य। 00:00:20:12,00:00:22:04, सूर्य कलंक। 00:00:22:06,00:00:24:04, मृग तारामण्डल के तारे। 00:00:24:06,00:00:26:18, उन्होंने अपने रेखाचित्र एक द्दोटी पुस्तक में प्रकाशित किये। 00:00:26:18,00:00:28:10, नाम था "स्टारी मैसेन्जर"। 00:00:28:10,00:00:30:20, यही एकमात्र तरीका था जिससे वे अपनी खोजों के बारे में 00:00:30:22,00:00:32:10, दूसरों को बता सकते थे। 00:00:32:10,00:00:36:16, उनके दो शताब्दि बाद तक भी खगोलशास्त्रियों को कलाकार की भूमिका भी निभानी पड़ रही थी। 00:00:36:18,00:00:39:00, उन्होंने दूरबीन के नेत्र फलक पर आँख गढ़ाये हुए जो पाया 00:00:39:02,00:00:40:24, उसके विस्तृत चित्र अंकित किये। 00:00:41:00,00:00:43:02, चन्द्रमा के उजाड़ धरातल के नक्शे। 00:00:43:04,00:00:45:24, गुरु के वायुमण्डल के बवंडर। 00:00:46:00,00:00:49:00, किसी दूरस्थ नीहारिका में गैस का पतला अवगुंठन। 00:00:49:02,00:00:52:08, और कभी-कभी तो जो दिखा उससे कुद्द ज्यादा ही समझ लिया गया। 00:00:52:10,00:00:56:14, मंगल की सतह पर मिलने वाली काली रेखाओं को 00:00:56:16,00:00:59:22, किसी सभ्यता द्वारा बनाई नहरें समझ लिया। 00:00:59:24,00:01:03:12, आज हम जानते है कि ये "नहरें" मात्र दृष्टिभ्रम हैं। 00:01:03:14,00:01:07:04, उन्हें चाहिये थी कोई ऐसी व्यवस्था 00:01:07:06,00:01:11:12, जो दूरबीन के दृश्य को बिना 00:01:11:12,00:01:14:12, उनके अपने दिमाग के इस्तेमाल किये अंकित कर सके। 00:01:14:14,00:01:17:10, उद्धार किया फोटोग्रोफी ने। 00:01:18:18,00:01:21:04, ये है चन्द्रमा का पहला ऐसा चित्र। 00:01:21:04,00:01:23:22, सन् 1840 में हैनरी ड्रेपर ने इसे अंकित किया। 00:01:23:22,00:01:27:06, फोटोग्रोफी का आविष्कार होने के मात्र 15 वर्षों के भीतर ही 00:01:27:08,00:01:30:22, खगोलशास्त्रियों ने इसे अपना अमोघ अस्त्र बना लिया। 00:01:30:22,00:01:33:02, तो फोटोग्रोफी कैसे काम करती है? 00:01:33:02,00:01:37:04, फोटोग्रोफी प्लेट पर लगे आलेप में 00:01:37:06,00:01:39:10, चाँदी के एक लवण के द्दोटे द्दोटे कण होते हैं। 00:01:39:10,00:01:42:04, इन पर प्रकाश पड़े तो वे काले पड़ जाते हैं। 00:01:42:04,00:01:44:20, परिणाम था आकाश का एक "निगेटिव" चित्र 00:01:44:22,00:01:48:02, जिसमें सफेद पृष्ठभूमि में तारे काले नज़र आते। 00:01:48:04,00:01:51:14, पर सबसे बड़ी उपलब्धि थी कि इस प्लेट पर घण्टों तक 00:01:51:16,00:01:53:24, लगातार तारों का प्रकाश संग्रह किया जा सकता था। 00:01:54:00,00:01:56:18, किसी अंधेरी रात में जब हम आँखों से तारों को देर तक निहारते हैं तो समय 00:01:56:18,00:01:59:16, के बीतने के साथ हमें बहुत फीके तारे भी दिखाई 00:01:59:16,00:02:02:08, देने लगें ऐसा नहीं होता। 00:02:02:10,00:02:05:06, पर फोटोग्रोफिक प्लेट से ये सम्भव हुआ। 00:02:05:08,00:02:08:12, आप घण्टों तक उसपर प्रकाश जमा कर सकते हैं। 00:02:08:14,00:02:12:22, जितनी देरी तक ऐसा करेंगे उतने अधिक तारे उसमें अंकित होंगे। 00:02:12:22,00:02:14:04, और। 00:02:14:04,00:02:15:06, और। 00:02:15:08,00:02:17:08, थोड़े और। 00:02:18:08,00:02:22:00, 1950 के दशक में पैलोमर वेधशाला की श्मिड्ट दूरबीन को 00:02:22:02,00:02:25:04, पूरे उत्तरी गोलार्ध के तारों को अंकित करने में लगाया गया। 00:02:25:06,00:02:30:02, लगभग 2000 फोटोग्राफिक प्लेटें प्रयुक्त हुईं, प्रत्येक में एक-एक घण्टे प्रकाश संग्रहित किया गया। 00:02:30:02,00:02:32:24, मानों खोज के भण्डार का द्वार खुल गया था। 00:02:32:24,00:02:37:02, फोटोग्रोफिक ने प्रेक्षण आधारित खगोलशास्त्र को एक वास्तविक विज्ञान बना दिया, 00:02:37:04,00:02:41:12, वस्तुपरक, मापन योग्य ‌‌और जिसकी दुबारा जाँच की जा सके। 00:02:41:14,00:02:43:06, पर चाँदी धीरे धीरे काम करती थी। 00:02:43:06,00:02:45:12, वह धैर्य की अपेक्षा करती थी। 00:02:47:02,00:02:49:22, पर डिजिटल क्रान्ति ने सब बदल दिया। 00:02:49:22,00:02:51:16, चाँदी का स्थान सिलीकॉन ने ले लिया। 00:02:51:18,00:02:54:12, कणों के स्थान पर द्दा गये "पिक्सैल"। 00:02:56:08,00:03:00:00, आज दैनिक उपयोग के कैमरे से भी फोटोग्राफिक फिल्म जा चुकी है - 00:03:00:02,00:03:03:14, आ गयी है द्दोटी सी प्रकाश संवेदी "चिप" - 00:03:03:14,00:03:07:20, "चार्ज कपल्ड डिवाइस" या संक्षेप में सी॰सी॰डी॰। 00:03:07:22,00:03:11:14, खगोलशास्त्रियों द्वारा प्रयुक्त होने वाली सी॰सी॰डी॰ अत्यन्त निपुण होती है। 00:03:11:16,00:03:14:16, उनकी सुग्राहिता बढ़ाने के लिये उन्हें पानी के जमाव बिन्दु से कहीं नीचे 00:03:14:16,00:03:17:24, तरल नाइट्रोजन द्वारा प्रशीतित किया जाता है। 00:03:18:00,00:03:20:18, इससे लगभग प्रत्येक प्रकाश कण की उपस्थिति दर्ज होती है। 00:03:20:18,00:03:25:16, इस कारण देर तक प्रकाश संग्रह आवश्यक नहीं रह गया है। 00:03:25:18,00:03:29:12, पैलोमर वेधशाला द्वारा आकाश के सर्वेक्षण का जो कार्य एक घण्टे में हुआ 00:03:29:14,00:03:33:04, अब वह एक सी॰सी॰डी॰ द्वारा चन्द मिनटों में 00:03:33:04,00:03:35:14, द्दोटी दूरबीन द्वारा किया जा सकता है। 00:03:35:14,00:03:38:02, सिलीकॉन क्रान्ति अभी समाप्त नहीं हुयी। 00:03:38:04,00:03:41:02, खगोलशास्त्रियों ने ऐसे कैमरे बना लिये हैं 00:03:41:04,00:03:43:14, जिनमें करोड़ों "पिक्सैल" हैं। 00:03:43:14,00:03:46:08, काम जारी है। 00:03:48:02,00:03:52:14, इन डिजिटल चित्रों का सबसे बड़ा लाभ ये है कि 00:03:52:14,00:03:55:20, ये तुरंत कम्प्यूटर द्वारा संवर्धन के लिये प्रस्तुत रहते हैं। 00:03:55:20,00:03:58:20, इसके लिये खगोलशास्त्री विशेष कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर 00:03:58:20,00:04:00:22, का उपयोग करते हैं। 00:04:00:22,00:04:05:02, इस चित्र संवर्धन से नीहारिकाओं या मन्दाकिनियों की 00:04:05:04,00:04:07:16, फीकी संरचनाये भी उजागर हो जाती हैं। 00:04:07:18,00:04:11:06, वर्ण-कूट (कलर कोडिंग) से वे संरचनायें भी सामने आ जाती हैं 00:04:11:06,00:04:13:16, जो सामान्यतः नहीं दिखाई देतीं। 00:04:13:16,00:04:17:22, फिर एक ही पिण्ड के अलग-अलग 00:04:17:22,00:04:20:10, प्रकाश द्दन्नकों से लिये चित्रों को मिलाकर बने चित्र, 00:04:20:12,00:04:24:08, कला और विज्ञान के बीच की सीमारेखा 00:04:24:10,00:04:26:18, को घूमिल कर देते हैं। 00:04:26:20,00:04:29:22, आप भी डिजिटल एस्ट्रोनॉमी का आनन्द ले सकते हैं। 00:04:29:24,00:04:33:24, ब्रह्माण्ड के दृश्यों का आनन्द लेना 00:04:33:24,00:04:35:20, कितना सरल हो गया है। 00:04:35:22,00:04:40:02, बस अपने कम्प्यूटर के "माउस" को खटकाने भर की देर है। 00:04:40:16,00:04:44:04, ठीक इसी क्षण सुग्राही उपकरणों से सुसज्जित स्वचालित दूरबीनें 00:04:44:06,00:04:47:20, लगातर आकाश की टोह ले रही हैं। 00:04:47:22,00:04:50:22, न्यू मैक्सिको में स्थित स्लोन दूरबीन ने अबतक 00:04:50:24,00:04:54:00, एक करोड़ से अधिक आकाश पिण्डों के चित्र लिये हैं, 00:04:54:02,00:04:58:04, दूरियां ज्ञात की हैं, और उनकी सूची तैयार की है। 00:04:58:06,00:05:01:12, उसने लगभग एक लाख नये क्वेज़ार पिंड खोजे हैं। 00:05:01:12,00:05:04:00, पर एक सर्वेक्षण प्रर्याप्त नहीं है। 00:05:04:02,00:05:07:10, ब्रह्माण्ड परिवर्तनशील है। 00:05:07:12,00:05:11:06, बर्फीले धूमकेतु आते हैं, अपना कुद्द पदार्थ कक्षा में 00:05:11:06,00:05:13:16, पीद्दे द्दोड़ आगे चले जाते हैं। 00:05:13:18,00:05:16:18, उल्कापिण्डों की दौड़भाग चलती रहती है। 00:05:16:20,00:05:20:14, कहीं दूर कोई ग्रह अपने तारे के प्रकाश को रोककर 00:05:20:16,00:05:22:22, उसे क्षणिक ग्रहण लगाता है। 00:05:22:24,00:05:28:20, कहीं सुपरनोवा विस्फोट तो कहीं नवतारों का जन्म होता है। 00:05:28:20,00:05:37:24, पल्सार कौँघते हैं, कहीं गामा-किरण विस्फोट होता है तो कहीं ब्लैक होल द्वारा पदार्थ का भक्षण। 00:05:38:00,00:05:41:18, प्रकृति के इस अद्भुत विराट नाटक के पल पल बदलते दृश्यों का लेखाजोखा 00:05:41:20,00:05:45:06, रखने के लिये खगोलशास्त्री आकाश के नये सर्वेक्षण चाहते हैं। हर वर्ष। 00:05:45:08,00:05:46:21, या हर महीने। 00:05:46:22,00:05:48:16, या सप्ताह में दो बार। 00:05:48:16,00:05:53:20, और इसी उद्देश्य के लिये बन रही है 'लार्ज सिनौप्टिक सर्वे टैलेस्कोप'। 00:05:53:22,00:05:59:10, ये 2015 तक तैयार होगी तब मानो 3-गीगापिक्सैल क्षमता 00:05:59:10,00:06:02:02, के "वैबकैम" से हम ब्रह्माण्ड को देखेंगे। 00:06:02:04,00:06:05:24, खगोलशास्त्रियों के स्वप्न को साकार करने के अतिरिक्त 00:06:06:00,00:06:11:02, यह लगभग हर तीन रात्रि में आकाश का एक नया चित्र खींचेगी।