//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:00:00,00:00:04:19, 5. दर्शन अदृश्य के। 00:00:06:08,00:00:09:02, जब आप अपना प्रिय संगीत सुनते हैं तो 00:00:09:03,00:00:12:20, आपके कान मृदंग की कम आवृत्ति से लेकर 00:00:12:21,00:00:16:03, तार सप्तक तक को ग्रहण करते हैं। 00:00:16:04,00:00:18:24, कल्पना करें कि हमारे कान की संवेदिता 00:00:19:08,00:00:20:23, बस थोड़ी ही आवृत्तियों के लिये होती। 00:00:20:24,00:00:23:13, बहुत सी अच्छी चीजों से हम वंचित रह जाते। 00:00:23:14,00:00:27:00, पर खगोलशास्त्री इसी परिस्थिति में हैं। 00:00:27:01,00:00:30:04, हमारी आँखें केवल 00:00:30:05,00:00:33:00, दृश्य प्रकाश के लिये संवेदी हैं। 00:00:33:01,00:00:35:14, पर वर्णक्रम के शेष बड़े भाग 00:00:35:15,00:00:37:15, के प्रति हम अन्धे हैं। 00:00:37:16,00:00:40:16, पर ब्रह्माण्ड के बहुतायत पिण्ड इस अदृश्य प्रकाश का 00:00:40:17,00:00:43:24, भी उत्सर्जन करते हैं। 00:00:44:00,00:00:47:19, उदाहरण स्वरुप 1930 के दशक में संयोग से ये खोज हुई 00:00:47:20,00:00:51:06, कि अंतरिक्ष से रेडियो तरंगें आ रही हैं। 00:00:51:07,00:00:53:24, इन में से कुछ तरंगों की आवृत्ति आपके प्रिय 00:00:54:00,00:00:57:04, रेडियो स्टेशन जितनी, कम शक्तिशाली, 00:00:57:05,00:00:59:07, पर संगीतहीन थी। 00:01:00:12,00:01:03:24, रेडियो-ब्रह्माण्ड को सुनने के लिये आपको 00:01:04:00,00:01:06:14, विशेष उपकरण चाहिये - रेडियो दूरबीन। 00:01:06:16,00:01:10:24, लम्बे तरंग दैर्घ्य की तरंगों के सिवाय बाकी सब तरंगों के लिये एक रेडियो दूरबीन बस एक जालीदार डिश है। 00:01:11:00,00:01:14:02, जैसे किसी सामान्य दूरबीन का दर्पण। 00:01:14:04,00:01:18:10, पर रेडियो तरंगों की लम्बाई सामान्य प्रकाश से बहुत अधिक होती है 00:01:18:10,00:01:21:06, इसीलिये डिश की सतह को दर्पण 00:01:21:08,00:01:23:00, जैसा सुचिक्कण नहीं बनाना पड़ता। 00:01:23:02,00:01:25:16, इसीलिये एक बड़ी रेडियो दूरबीन का निर्माण कार्य 00:01:25:16,00:01:30:20, प्रकाश-दूरबीन की तुलना में अपेक्षाकृत सरल है। 00:01:30:20,00:01:34:24, रेडियो दूरबीनों द्वारा व्यतिकरण भी बहुत आसानी से किया जाता है। 00:01:34:24,00:01:38:02, यानि दो डिशों के संकेतों 00:01:38:02,00:01:41:24, को जोड़कर आप 00:01:42:00,00:01:45:14, एक विशाल डिश की क्षमता हासिल कर लेते हैं। 00:01:45:14,00:01:48:16, न्यू मैक्सिको में स्थापित "वैरी लार्ज एरे" में 00:01:48:16,00:01:53:18, 25 - 25 मीटर व्यास के 27 डिश एण्टेना हैं। 00:01:53:18,00:01:56:24, प्रत्येक डिश अपनी जगह से हटाई जा सकती है। 00:01:57:00,00:02:00:10, इसके सबसे विस्तृत संयोजन में यह प्रणाली 00:02:00:12,00:02:04:20, 35 किमी॰ व्यास जितनी बड़ी दूरबीन सा व्यवहार करती है। 00:02:04:22,00:02:07:14, तो रेडियो तरंगों से ब्रह्माण्ड का क्या स्वरुप मिलता है? 00:02:07:16,00:02:12:00, हमारा सूर्य रेडियो तरंगों में बहुत चमकीला नज़र आता है। 00:02:12:02,00:02:14:18, उसी प्रकार है हमारी मन्दाकिनी का केन्द्र। 00:02:14:18,00:02:16:10, पर और भी चीज़ें हैं। 00:02:16:12,00:02:20:12, पल्सार नामक पिण्ड - तारों के शव - 00:02:20:12,00:02:22:16, एक पतले पुंज में रेडियो तरंगे फेंकते हैं। 00:02:22:16,00:02:25:20, वे अपनी धुरी पर अत्यंत तेजी से - 00:02:25:20,00:02:27:18, एक सेकिण्ड में सैकड़ों बार तक - घूमते हैं। 00:02:27:18,00:02:31:20, एक तरह से ये समुद्र में लगे प्रकाश स्तम्भ सरीखे हैं। 00:02:31:22,00:02:35:08, मानो रेडियो लाइट‍‍‍‍‍-‍‍हाउस। 00:02:35:08,00:02:38:08, हमें मिलता है तेज़ रेडियो स्पंदन। 00:02:38:10,00:02:40:16, इसी लिये यह नाम पड़ा। 00:02:40:16,00:02:43:08, शर्मिष्ठा-अ नाम का यह रेडियो स्रोत 00:02:43:10,00:02:47:16, एक सुपरनोवा विस्फोट का अवशेष है जो 17वीं सदी में हुआ था। 00:02:47:16,00:02:52:06, नरतुरंग‍-अ, हंस-अ, तथा कन्या-अ ये सभी विशाल मन्दाकिनियाँ हैं 00:02:52:06,00:02:54:16, जो भारी मात्रा में रेडियो तरंगे उंडेल रही हैं। 00:02:54:16,00:02:59:24, प्रत्येक मन्दाकिनी के केन्द्र में स्थित भारी ब्लैकहोल उसे ऊर्जा प्रदान करता है। 00:03:00:00,00:03:04:00, इन रेडियो मंदाकिनियों का उत्सर्जन इतना शक्तिशाली है 00:03:04:02,00:03:09:08, कि हम 10 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी से भी इसे ग्रहण कर पा रहे हैं। 00:03:09:08,00:03:12:22, और दूसरी तरफ है कम तरंग दैर्घ्य का 00:03:12:24,00:03:15:08, बहुत कमजोर विकिरण जो पूरे ब्रह्माण्ड में व्याप्त है। 00:03:15:08,00:03:18:04, इसे "कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउण्ड" कहते हैं 00:03:18:04,00:03:20:10, जो बिगबैंग संज्ञा वाले आदि विस्फोट की अनुगूँज है। 00:03:20:10,00:03:24:14, ब्रह्माण्ड के आग्नेय आदिकाल की ठण्डी पड़ी लपट। 00:03:26:02,00:03:30:10, विकिरण के वर्णक्रम का प्रत्येक भाग एक अलग कहानी कहता है। 00:03:30:10,00:03:33:24, मिलीमीटर और उससे छोटी तरंगों में 00:03:33:24,00:03:37:02, आदि ब्रह्माण्ड में मंदाकिनियों के सृजन तथा 00:03:37:04,00:03:41:06, हमारी मंदाकिनी में तारों ग्रहों के उद्भव की झलक मिलती है। 00:03:41:06,00:03:45:10, पर इस विकिरण का अधिकांश भाग हमारे वायुमण्डल की वाष्प सोख लेती है। 00:03:45:12,00:03:48:10, इसे पाने के लिये थोड़ा ऊपर और शुष्क स्थान पर जाना होगा। 00:03:48:10,00:03:51:08, जैसे ल्यानो-डि-चायनेटर। 00:03:51:10,00:03:54:24, समुद्र सतह से पाँच किलोमीटर की ऊँचाई पर 00:03:54:24,00:03:57:24, उत्तरी चिली के इस अजूबे पठार पर यह 00:03:58:00,00:04:00:22, "एल्मा" यानि "एटाकामा लार्ज मिलीमीटर एरे" की निर्माण स्थली है। 00:04:00:22,00:04:05:22, सन् 2014 में जब ये पूरी होगी 00:04:05:22,00:04:08:08, तो विश्व की सबसे बड़ी वेधशाला होगी। 00:04:08:20,00:04:13:24, इस में 100-100 टन के 64 एण्टेना समवेत कार्यरत होंगे। 00:04:13:24,00:04:17:22, लन्दन शहर जैसे विशाल क्षेत्र में फैले इन 00:04:17:24,00:04:20:20, एण्टेनाओं को विशाल ट्रकों द्वारा इधर उधर खिसकाया जायेगा 00:04:20:22,00:04:23:00, ताकि चौड़ा अथवा संकीर्ण दृश्य तैयार किया जा सके। 00:04:23:02,00:04:27:06, प्रत्येक खिसकाव मिलीमीटर की परिशुद्धता से किया जायेगा। 00:04:28:16,00:04:32:04, ब्रह्माण्ड में बहुत से पिण्ड अवरक्त प्रकाश उत्सर्जित करते हैं। 00:04:32:06,00:04:35:24, विलियम हर्शल द्वारा खोजे अवरक्त प्रकाश या 00:04:36:00,00:04:40:18, "इन्फ्रारैड रेडिएशन" का सभी गर्म पिण्डों के साथ 00:04:40:18,00:04:43:02, हम मानव भी उत्सर्जन करते हैं। 00:04:45:20,00:04:49:06, शायद आप इससे परिचित हों। 00:04:49:08,00:04:52:06, आजकल रात में देखने वाले गॉगल्स 00:04:52:08,00:04:55:04, तथा कैमरों में यह प्रयुक्त होता है। 00:04:55:06,00:04:59:04, परन्तु दूर के पिण्डों से आ रहे अवरक्त प्रकाश को कैद करने के लिये 00:04:59:06,00:05:02:24, उपकरण को परम शून्य से बस थोड़ा उपर तक ठंडा करना पडता है 00:05:03:00,00:05:08:00, ताकि स्वयम् उपकरण से निकल रहा विकिरण कम हो जाय। 00:05:10:22,00:05:15:18, आज की बड़ी दूरबीनों में इसीलिये अवरक्त कैमरे भी लगे होते हैं। 00:05:15:18,00:05:19:08, इनसे ब्रह्माण्ड के धूल ले बादलों को भेदकर अन्दर नवजात तारों को खोजा जा सका है, 00:05:19:10,00:05:24:06, जो सामान्य दृश्य प्रकाश में सम्भव नहीं है। 00:05:24:06,00:05:29:02, उदाहरण स्वरुप मृग नीहारिका की यह प्रसिद्ध तारों की पौधशाला 00:05:29:04,00:05:31:10, अवरक्त प्रकाश में कितनी भिन्न लगती है। 00:05:31:12,00:05:34:02, 00:05:34:04,00:05:37:08, अवरक्त प्रकाश को देखने की यह क्षमता दूरस्थित 00:05:37:08,00:05:39:24, मंदाकिनियों के अध्ययन में सहायक होती है। 00:05:39:24,00:05:45:00, किसी युवा मंदाकिनी के नवजात तारे तीव्र पराबैगनी प्रकाश देते हैं। 00:05:45:02,00:05:49:00, पर अरबों प्रकाश की दूरी पार करते 00:05:49:02,00:05:50:16, हुए ब्रह्माण्ड का निरंतर प्रसार इसे 00:05:50:18,00:05:54:14, हम तक पहुँचते-पहुँचते 00:05:54:14,00:05:59:06, अवरक्त बना देता है। 00:06:00:14,00:06:04:06, विशिष्ट शैली का यह ला-पाल्मा स्थित मैजिक टैलिस्कोप है। 00:06:04:08,00:06:06:24, इसका काम है सबसे तीव्र विकिरण 00:06:06:24,00:06:10:20, "गामा किरणों" का पता लगाना। 00:06:12:08,00:06:14:24, हमारा वायुमण्डल, सौभाग्य से विनाशकारी 00:06:14:24,00:06:16:08, गामा किरणों को अवशोषित कर लेता है। 00:06:16:08,00:06:20:00, पर इनकी बची पदचाप खगोलशास्त्रियों द्वारा अध्ययन के लिये पर्याप्त होती है। 00:06:20:02,00:06:23:00, वातावरण से टकराने पर ये ऊर्जावान कणों 00:06:23:02,00:06:24:16, की वृष्टि पैदा करते हैं जिससे एक हल्की आभा 00:06:24:18,00:06:29:08, उत्पन्न होती है जो मैजिक दूरबीन देख लेती है। 00:06:30:22,00:06:34:16, ये है अर्जेन्टाइना की पियरे आगर वेधशाला। 00:06:34:16,00:06:37:02, ये दूरबीन जैसी बिल्कुल नहीं लगती। 00:06:37:02,00:06:42:24, इसमें 3000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 00:06:42:24,00:06:44:06, 1600 संसूचक (डिटैक्टर) लगे हैं। 00:06:44:08,00:06:48:14, ये दूर हो रहे सुपरनोवा व ब्लैकहोल के 00:06:48:14,00:06:50:12, विस्फोट से उपजे ओजस्वी कणों की टोह लेते हैं। 00:06:51:16,00:06:56:10, और, अन्टार्कटिक की मोटी बरफ के नीचे गहराई में लगे 00:06:56:12,00:06:59:18, इन न्यूट्रिनो डिटैक्टर्स को 00:06:59:20,00:07:01:22, क्या आप दूरबीन की संज्ञा देंगे? 00:07:01:24,00:07:03:10, क्यों नहीं? 00:07:03:12,00:07:07:20, आखिर ये भी तो ब्रह्माण्ड को ही 00:07:07:20,00:07:10:02, अन्य प्रकार से देख रहे हैं। 00:07:10:02,00:07:13:22, न्यूट्रिनो वे दुश्प्राप्य कण हैं जो सूर्य, 00:07:13:24,00:07:16:06, तारों और सुपरनोवा विस्फोट में उत्पन्न होते हैं, 00:07:16:08,00:07:19:20, ये आदि विस्फोट "बिग बैंग" के समय भी उत्पन्न हुए थे। 00:07:19:22,00:07:24:16, अन्य मूलभूत कणों के विपरीत ये आवेशहीन कण पदार्थ से होकर लगभग 00:07:24:16,00:07:29:16, प्रकाश की गति से गुजर जाते हैं। 00:07:29:18,00:07:34:06, इसलिये इन्हे पकड़ पाना और अध्ययन करना कठिन है। पर ये हैं बहुतायत में। 00:07:34:06,00:07:38:04, प्रति सेकिण्ड सूर्य से निकले खरबों 00:07:38:04,00:07:40:14, न्यूट्रिनो हमारे शरीर से होकर गु़ज़रते हैं। 00:07:40:16,00:07:44:20, और उधर खगोलशास्त्रियों और भौतिकीविदों के संयुक्त प्रयास से 00:07:44:22,00:07:46:16, गुरुत्वाकर्षणीय तरंगों के संसूचक बनने लगे हैं। 00:07:46:16,00:07:50:16, ये "दूरबीनें" न तो किसी प्रकाश और न कण का प्रेक्षण लेती हैं। 00:07:50:16,00:07:55:06, बल्कि ये उन हल्की लहरों या कंपनों को टोहने का प्रयास करती हैं 00:07:55:06,00:08:00:24, जो आइन्सटाइन के सापेक्षता के सिद्धान्त अनुसार दिक्काल में होते हैं। 00:08:01:00,00:08:05:04, विविध उपकरणों की सहायता से खगोलशास्त्रियों ने न केवल पूरे 00:08:05:04,00:08:10:24, विद्युद्चुम्बकीय वर्णक्रम बल्कि उसके भी परे गवेषणा के द्वार खोले हैं। 00:08:11:00,00:08:15:06, पर कुछ प्रेक्षण ऐसे हैं जो यहाँ धरा पर बैठे नहीं किये जा सकते। 00:08:15:06,00:08:16:20, इसका उत्तर? 00:08:16:22,00:08:19:06, अन्तरिक्ष दूरबीनें।