//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:00:00,00:00:04:14, 6. धरती के परे 00:00:06:13,00:00:08:10, हबल अंतरिक्ष दूरबीन। 00:00:08:11,00:00:11:09, अबतक की सबसे प्रसिद्ध अंतरिक्ष दूरबीन। 00:00:11:10,00:00:12:20, और हो भी क्यों न? 00:00:12:21,00:00:16:14, हबल ने खगोलशास्त्र की विभिन्न शाखाओं में क्रान्ति पैदा कर दी है। 00:00:16:15,00:00:20:01, आधुनिक मानकों में हबल का दर्पण द्दोटा आँका जायेगा- 00:00:20:02,00:00:23:01, मात्र 2.4 मीटर व्यास। 00:00:23:02,00:00:26:16, पर इसकी स्थापना स्थली सचमुच धरातीत है। 00:00:26:17,00:00:30:09, हमारे वातावरण की झिलमिलाहट से कहीं ऊपर से ये 00:00:30:10,00:00:32:15, ब्रह्माण्ड को अत्यन्त स्पष्ट और प्रखर स्वरुप में देखती है। 00:00:32:16,00:00:37:09, यही नहीं यह पराबैंगनी और अवरक्त प्रकाश को भी देखती है। 00:00:37:10,00:00:40:12, इस प्रकाश को धरती पर स्थित दूरबीनें नहीं देख पातीं 00:00:40:13,00:00:43:22, क्योंकि वायुमण्डल इसे अवशोषित कर लेता है। 00:00:43:23,00:00:47:22, इसमें लगे विशाल कैमरे ‌और वर्णक्रमापी सुदूर ब्रह्माण्ड से आ रहे 00:00:47:23,00:00:52:15, विकिरण की पूरी द्दानबीन करते हैं। 00:00:52:16,00:00:57:08, किसी भूस्थित दूरबीन की ही भाँति इसकी भी बार-बार मरम्मत करनी पड़ती है। 00:00:57:09,00:01:00:19, ये काम करते हैं अंतरिक्ष में तैरते एस्ट्रोनॉट। 00:01:00:20,00:01:02:11, पुराने पड़ गये भाग बदले जाते हैं। 00:01:02:12,00:01:05:00, कई बार नयी तकनीक से विकसित उपकरण 00:01:05:01,00:01:07:20, पुरानों का स्थान लेते हैं। 00:01:07:21,00:01:11:07, हबल खगोलशास्त्र का विजयरथ बन गयी। 00:01:11:08,00:01:15:06, इसने ब्रह्माण्ड के बारे में हमारी सोच बदल दी। 00:01:17:20,00:01:22:20, अपनी दिव्यदृष्टि से इसने मंगल पर ऋतु परिवर्तन 00:01:23:22,00:01:26:20, तथा गुरु पर धूमकेतु की बमबारी देखी। 00:01:28:12,00:01:31:22, शनि के वलयों की धार देखी 00:01:34:22,00:01:38:10, और द्दोटे से प्लूटो की सतह भी। 00:01:38:11,00:01:44:08, इसने तारों के जीवन चक्र को नवजात तारे के धूलयुक्त बादल में जन्म से 00:01:44:14,00:01:50:14, लेकर भावभीनी विदाई के इस क्षण तक दिखाया। 00:01:50:15,00:01:55:20, कोमल नीहारिका, मानों मृत्युप्राप्त तारे की अन्तिम श्वास 00:01:55:22,00:02:02:24, या भीषण सुपरनोवा विस्फोट जिसके सामने समूची मन्दाकिनी फी़की नज़र आती है। 00:02:03:00,00:02:06:24, मृग नीहारिका के गहन गर्भ में हबल ने नव सौर मण्डलों को बनते देखा - 00:02:07:00,00:02:12:02, नव तारों के गिर्द बनी धूलभरी चकती जो शीघ्र 00:02:12:02,00:02:14:02, ग्रहों में परिवर्तित हो जायेगी। 00:02:14:04,00:02:18:08, हबल ने तारों के अंगूरी गुच्द्दों में विभिन्न हजारों तारों का अध्ययन किया। 00:02:18:10,00:02:23:24, ये गुच्द्दे ब्रह्माण्ड की अत्यन्त प्रौढ़ पीढी हैं। 00:02:24:00,00:02:26:08, मन्दाकिनीयाँ भी। 00:02:26:10,00:02:29:24, इससे पहले इतना विषद स्वरुप न देखा गया था। 00:02:29:24,00:02:36:20, वलयाकार भुजाओं वाली मन्दाकिनियाँ, उनमें धूल के गलियारे, प्रचण्ड टक्कर। 00:02:39:00,00:02:43:12, जब आकाश के अंधियारे भाग के लम्बे अभिमुख काल के चित्र लिये गये 00:02:43:12,00:02:48:02, तो उनमें कम कान्ति की हजारों मन्दाकिनीयाँ मिलीं हमसे अरबोँ प्रकाश वर्ष दूर स्थित। 00:02:48:02,00:02:51:24, उसने प्रकाश किरणें तब निकली थीं जब ब्रह्माण्ड शैशव में था। 00:02:52:00,00:02:56:10, यह एक ऐसी जादुई खिड़की है जो हमें अतीत ‌और वर्तमान के 00:02:56:10,00:02:59:14, परिवर्तनशील ब्रह्माण्ड दोनों को दिखाती है। 00:03:00:04,00:03:02:22, हबल एकमात्र अंतरिक्ष दूरबीन नहीं है। 00:03:02:22,00:03:07:20, वर्ष 2003 में नासा ने स्पिट्ज़र स्पेस टैलिस्कोप स्थापित की। 00:03:07:22,00:03:11:18, यह हबल जैसा ही काम अवरक्त प्रकाश में करती है। 00:03:11:18,00:03:15:24, स्पिट्ज़र का दर्पण व्यास में मात्र 85 सेण्टीमीटर व्यास का है। 00:03:15:24,00:03:19:02, दूरबीन को सूर्य की गरमी से बचाने के 00:03:19:04,00:03:20:12, लिये एक कवच लगाया गया है। 00:03:20:12,00:03:25:04, इसके संवेदी उपकरण एक द्ववीभूत हीलियम के पात्र में 00:03:25:04,00:03:28:02, परम शून्य से बस थोड़ा ऊपर के तापमान 00:03:28:04,00:03:29:20, पर ठण्डे रखे जाते हैं। 00:03:29:22,00:03:33:14, इससे ये प्रबल संवेदी बन जाते हैं। 00:03:33:16,00:03:36:18, स्पिट्ज़र ने हमारा धूलभरे ब्रह्माण्ड से परिचय कराया। 00:03:36:18,00:03:40:14, धूलभरे अपारदर्शी बादल उत्तप्त हो अवरक्त प्रकाश देते हैं। 00:03:40:16,00:03:42:14, 00:03:42:14,00:03:46:18, मन्दाकिनियों की टकराहट से उत्पन्न झंझावात धूल में वलयों 00:03:46:18,00:03:51:12, की संरचना करते हैं जो नवतारों की जन्म स्थली बनते हैं। 00:03:53:12,00:03:57:02, तारे की मृत्यु से भी धूल उत्पन्न होती है। 00:03:57:04,00:04:01:02, स्पिट्ज़र ने पाया कि ग्रहरुपी नीहारिकाओं और सुपरनोवा अवशेषों में 00:04:01:04,00:04:06:08, ऐसी धूलभरी भविष्य के ग्रहों की निर्माण स्थलियां हैं। 00:04:06:10,00:04:10:02, दूसरी अवरक्त तरंगों पर कार्य कर स्पिट्ज़र ने 00:04:10:04,00:04:15:18, बादलों के गर्भ में द्दिपे तारों को खोज निकाला। 00:04:15:20,00:04:18:24, उसने गुरु जैसे दैत्याकार गैसीय ग्रह - जो अन्य दूसरे सौर मण्डलों में हैं - 00:04:18:24,00:04:22:22, के वायुमण्डल का अध्ययन किया जो अपने तारे के गिर्द 00:04:22:22,00:04:26:22, मात्र चन्द दिनों में परिक्रमा लगा लेते हैं। 00:04:28:16,00:04:30:22, और एक्स तथा गामा किरणों का क्या? 00:04:30:22,00:04:33:14, वे तो पृथ्वी के वायुमण्डल में पूरी तरह अवशोषित हो जाती हैं। 00:04:33:16,00:04:37:04, अन्तरिक्ष दूरबीनों के बिना हम सदैव इन 00:04:37:04,00:04:40:02, विकिरणों के प्रति अन्धे ही बने रहते। 00:04:41:16,00:04:45:02, एक्स और गामा किरण दूरबीनों से उजागर होता है 00:04:45:02,00:04:49:20, एक उत्तप्त, ऊर्जामय और विध्वन्सकारी ब्रह्माण्ड का स्वरूप जिसमें मन्दाकिनियों 00:04:49:20,00:04:54:02, के गुच्छे हैं, ब्लैक होल हैं, सुपरनोवा विस्फोट और मन्दाकिनियों की टकराहट है। 00:04:56:18,00:04:58:21, पर ऐसी दूरबीनें बनाना बड़ा कठिन है। 00:04:58:22,00:05:02:11, ये विकिरण तो साधारण दर्पण को भेदता निकल जायेगा। 00:05:02:12,00:05:07:17, एक्स किरणों को केन्द्रीभूत करने के लिये प्याज़ के छिलके जैसे सोने से बने दर्पणों का उपयोग होता है। 00:05:07:18,00:05:11:03, और गामा किरणों के लिये विशेष प्रकार के सूचीछिद्र कैमरे अथवा 00:05:11:04,00:05:14:14, उत्स्फुलिंगन गणकों के ढेर का प्रयोग किया जाता है। 00:05:14:15,00:05:17:17, जब उनपर गामा किरण पड़ती है तो एक क्षणिक कौंध उत्पन्न होती है। 00:05:18:24,00:05:23:03, नासा ने 1990 के दशक में कॉम्प्टन गामा रे आब्ज़र्वेटरी शुरू की। 00:05:23:04,00:05:26:07, यह उस समय का सबसे बड़ा 00:05:26:08,00:05:27:22, और भारी वैज्ञानिक उपग्रह था। 00:05:27:23,00:05:31:03, मानो अन्तरिक्ष में विचरण करती पूरी की पूरी भौतिकी की प्रयोगशाला। 00:05:31:04,00:05:34:12, वर्ष 2008 में कॉम्प्टन का उत्तराधिकारी बनी "ग्लास्ट" 00:05:34:13,00:05:38:13, यानि गामा रे लार्ज एरिया स्पेस टैलिस्कोप। 00:05:38:14,00:05:42:03, यह ब्रह्माण्ड में उच्च ऊर्जा के क्षेत्र में 00:05:42:04,00:05:44:13, अन्ध पदार्थ से लेकर पल्सार तक सब कुछ देखेगी। 00:05:46:10,00:05:50:09, इसी बीच खगोलशास्त्रियों के पास दो एक्स-रे दूरबीनें अन्तरिक्ष में हैं। 00:05:50:10,00:05:55:10, एक है नासा की चन्द्रा एक्स-रे आब्ज़र्वेटरी और दूसरी ईएसए की एक्स-एम-एम-न्यूटन आब्ज़र्वेटरी। 00:05:55:11,00:05:59:12, दोनों ब्रह्माण्ड के सबसे गर्म स्थलों के अध्ययन में सन्नद्ध हैं। 00:06:01:25,00:06:05:17, एक्स-रे दृटि से आकाश कुछ ऐसा नज़र आता है। 00:06:05:18,00:06:10:04, ये फैले हुये आकार सुपरनोवा अवशेषों में झंझावात 00:06:10:05,00:06:13:17, तरंगों द्वारा गर्म हुये गैस के बादल हैं। 00:06:13:18,00:06:17:24, चमकीली बिन्दुवत् रचनायें एक्स-रे युग्म तारे हैं - जिनका एक घटक 00:06:17:25,00:06:21:16, न्यूट्रॉन तारा या ब्लैकहोल - दूसरे घटक के पदार्थ का भक्षण कर रहा है। 00:06:21:17,00:06:25:07, गिरता पदार्थ गर्म हो एक्स किरणों का उत्सर्जन कर रहा है। 00:06:25:08,00:06:29:14, एक्स-रे दूरबीनों ने दूरस्थ मन्दाकिनियों के केन्द्र में 00:06:29:15,00:06:31:19, दैत्याकार संहति वाले ब्लैकहोलों को खोजा है। 00:06:31:20,00:06:35:20, घूमता अन्दर की ओर घुमड़ता पदार्थ ब्लैकहोल में जाकर 00:06:35:21,00:06:40:04, अदृश्य होने से पहले गर्म हो एक्स किरणें बिखेरने लगता है। 00:06:40:05,00:06:44:21, मन्दाकिनियों के किसी ऐसे गुच्छे में गर्म 00:06:44:22,00:06:46:08, किन्तु झीनी गैस विद्यमान रहती है। 00:06:46:09,00:06:50:06, कभी-कभी टकराती, विलय होती मन्दाकिनियों के झंझावात 00:06:50:07,00:06:54:12, इसे ओर गर्म कर देते हैं। 00:06:54:13,00:06:58:19, इनसे भी रोचक हैं गामा किरण विस्फोट - 00:06:58:20,00:07:00:15, ब्रह्माण्ड की सबसे ऊर्जावान घटनायें। 00:07:00:16,00:07:04:23, तेज़ी से अपनी धुरी पर घूमते विराट संहति वाले 00:07:04:24,00:07:06:19, तारों की मृत्यु के समय ये विस्फोट होते हैं। 00:07:06:20,00:07:10:19, एक सेकिन्ड से भी कम समय में इनसे इतनी ऊर्जा मुक्त होती है 00:07:10:20,00:07:13:19, जितनी सूर्य दस अरब वर्ष में दे। 00:07:16:04,00:07:20:04, हबल, स्पिट्ज़र, चन्द्रा, एक्स-एम-एम-न्यूटन तथा ग्लास्ट 00:07:20:05,00:07:22:15, सभी बहूपयोगी विराट उपकरण हैं। 00:07:22:16,00:07:25:16, पर कुछ अन्तरिक्ष दूरबीनें छोटी तथा 00:07:25:17,00:07:27:06, सीमित कार्य हेतु बनायीं जाती हैं। 00:07:27:07,00:07:29:07, जैसे - कोरोट। 00:07:29:08,00:07:32:22, फ्रांस में बने इस उपग्रह का कार्य है तारों के भूकम्पनों को नापना 00:07:32:23,00:07:34:22, और दूसरे सौर मण्डलों के ग्रहों का अध्ययन करना। 00:07:34:23,00:07:39:06, नासा का छोटा सा स्विफ्ट उपग्रह एक्स तथा गामा किरण दूरबीनें का मिश्रण है 00:07:39:07,00:07:43:18, और काम है गामा रे विस्फोटों की पहेली सुलझाना। 00:07:43:19,00:07:48:04, और ये है डब्ल्यू मैप या विल्किन्सन माइक्रोवेव एनाइसोट्रोपी प्रोब 00:07:48:05,00:07:51:21, जिसने स्थापना के मात्र दो वर्षों में ही 00:07:51:22,00:07:55:07, - कास्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउण्ड विकिरण का अत्यन्त सूक्ष्मता से अध्ययन कर डाला। 00:07:55:08,00:07:59:05, डब्ल्यू मैप से ब्रह्माण्डिकीविदों को ब्रह्माण्ड के आरम्भिक की 00:07:59:06,00:08:04:17, अबतक सबसे अच्छी जानकारी मिली - 13 अरब वर्ष पुराना इतिहास। 00:08:04:18,00:08:07:16, अंतरिक्ष की सीमा लांघ पाना शायद दूरबीन के इतिहास की 00:08:07:17,00:08:10:06, सबसे प्रमुख और रोचक घटना रही। 00:08:10:07,00:08:12:19, क्या होगा अगला कदम?