//Font select and font size //$FontName = Arial $FontName = Mangal $FontSize = 30 //Character attributes (global) $Bold = FALSE $UnderLined = FALSE $Italic = FALSE //Position Control $HorzAlign = Center $VertAlign = Bottom $XOffset = 0 $YOffset = 0 //Contrast Control $TextContrast = 15 $Outline1Contrast = 8 $Outline2Contrast = 15 $BackgroundContrast = 0 //Effects Control $ForceDisplay = FALSE $FadeIn = 0 $FadeOut = 0 //Other Controls $TapeOffset = FALSE //$SetFilePathToken = <<:>> //Subtitles 00:00:00:00,00:00:02:22, 7. क्या है अगला कदम? 00:00:04:21,00:00:07:17, एरिज़ोना में जायेंट मैजेलन टेलेस्कोप का 00:00:07:18,00:00:09:15, पहला विशाल दर्पण ढाल लिया गया है। 00:00:09:16,00:00:12:22, इस विराट दूरबीन को चिली की 00:00:12:23,00:00:14:14, लास कैम्पानास वेधशाला में लगाया जायेगा। 00:00:14:15,00:00:18:06, इसके सात दर्पणों में प्रत्येक का व्यास 8 मीटर होगा 00:00:18:07,00:00:21:10, और ये एक फूल की पंखुड़ियों की भांति आयोजित रहेंगे। 00:00:21:11,00:00:24:10, इनसे एकत्र हो रहा कुल प्रकाश अब तक की विशाल दूरबीनों 00:00:24:11,00:00:27:25, की तुलना में चार गुने से ज्यादा होगा। 00:00:28:01,00:00:32:11, सन् 2015 में कैक दूरबीन का एक दैत्याकार स्वरुप 00:00:32:12,00:00:35:07, कैलिफोर्निया में स्थापित होगा 30 मीटर की दूरबीन के रुप में। 00:00:35:08,00:00:38:14, इसके सैकड़ों छोटे घटक मिलकर एक छः मंजिला इमारत 00:00:38:15,00:00:42:18, जितने बड़े दर्पण की रचना करेंगे। 00:00:42:19,00:00:47:13, यूरोप में 42 मीटर व्यास की अति विराट दूरबीन 00:00:47:25,00:00:51:09, की योजना शूरु हो चूकी है। 00:00:51:10,00:00:54:21, ओलिम्पिक तरणताल जितने विशाल इसके दर्पण का क्षेत्रफल 00:00:54:22,00:00:57:01, - 30 मीटर की दूरबीन की तुलना में दो गुना होगा। 00:00:57:02,00:01:01:15, भविष्य के ये दैत्य अवरक्त प्रकाश में अध्ययन के लिये उपकरणों से 00:01:01:16,00:01:06:09, सुसज्जित होंगे और एडैप्टिव आप्टिक्स पर आधारित होंगे। 00:01:06:10,00:01:09:01, आशा है ये हमें वे मन्दाकिनियाँ दिखा पायेंगी 00:01:09:02,00:01:12:08, जो ब्रह्माण्ड में सर्वप्रथम बनीं थीं। 00:01:12:09,00:01:15:08, शायद इनसे प्रथम बार हम किसी अन्य 00:01:15:09,00:01:18:09, सौरमण्डल के ग्रह को साफ-साफ देख पायें। 00:01:18:10,00:01:22:05, रेडियो खगोलशास्त्रियों के लिये 42 मीटर का आकार तो राई के दाने जितना हुआ। 00:01:22:06,00:01:24:23, वे छोटी छोटी दूरबीनों के 00:01:24:24,00:01:27:07, संश्लेषण से बड़ी दूरबीन बना लेते हैं। 00:01:27:08,00:01:30:25, नीदरलैण्डस् में लोफार - यानि - "लो फ्रीक्वैन्सी एरे" 00:01:31:01,00:01:32:18, का निर्माण शुरु हुआ है। 00:01:32:19,00:01:38:01, फाइबर-आप्टिक्स इसके 30 हजार एण्टेनाओं को एक सुपर कम्पूटर से जोड़ेगी। 00:01:38:02,00:01:41:16, इसकी अद्भुत बनावट में कोई हिलने डुलनेवाले भाग नहीं हैँ। 00:01:41:17,00:01:45:01, फिर भी यह आठ भिन्न दिशाओं मे एक साथ देख सकेगी। 00:01:45:02,00:01:48:08, लोफार तकनीक अन्ततः वर्ग किलोमीटर एरे 00:01:48:09,00:01:50:20, का मार्ग प्रशस्त करेगी 00:01:50:21,00:01:52:19, जो रेडियो खगोलशास्त्रियों की प्रथम कामना है। 00:01:52:20,00:01:56:21, इस अंतर्राष्ट्रीय दूरबीन का निर्माण आस्ट्रेलिया अथवा दक्षिणी अफ्रीका में होगा। 00:01:56:22,00:02:00:19, विशाल थालियों जैसे इसके एण्टेने और छोटे ग्राहक उपकरण 00:02:00:20,00:02:05:03, मिलकर रेडियो आकाश के अलभ्य विस्तृत दृश्य दिखलायेंगे। 00:02:05:04,00:02:08:23, और एक वर्ग किलोमीटर के ग्रहण क्षेत्रफल 00:02:08:24,00:02:12:16, के कारण ये अब तक बनी सबसे 00:02:12:17,00:02:15:03, सुग्राही रेडियो दूरबीन होगी। 00:02:15:04,00:02:20:06, चाहे नयी बन रहीं मन्दाकिनियाँ हों, टिमटिमाते पल्सार, 00:02:20:07,00:02:23:25, रेडियो विकिरण उत्सर्जन कर रहा कोई भी स्रोत 00:02:24:01,00:02:26:24, वो इतनी पैनी आँखों से बच न पायेगा। 00:02:26:25,00:02:30:12, शायद इस उपकरण से धरातीत सभ्यताओं 00:02:30:13,00:02:34:01, के रेडियो संकेत भी खोजे जायें। 00:02:34:02,00:02:37:09, और हाँ, अंतरिक्ष दूरबीनें? 00:02:37:10,00:02:41:06, पाँचवें और अन्तिम मरम्मत अभियान के बाद 00:02:41:07,00:02:46:17, हबल अंतरिक्ष दूरबीन सन् 2013 तक कार्यरत रह सकेगी। 00:02:46:18,00:02:50:23, उसी दौरान इसके उत्तराधिकारी का प्रक्षेपण होगा। 00:02:52:23,00:02:56:23, मिलिये जेम्स वैब स्पेस टैलेस्कोप से - एक अवरक्त प्रकाश वेधशाला 00:02:56:24,00:03:02:17, जिसका नामकरण नासा के एक पूर्व प्रशासक के नाम पर किया गया है। 00:03:02:18,00:03:07:01, जब यह अन्तरिक्ष में होगी इसका 6.5 मीटर व्यास का खंडों 00:03:07:02,00:03:10:17, में बँटा दर्पण एक फूल की तरह जा खिलेगा 00:03:10:18,00:03:13:14, और ये हबल से सात गुना शक्तिशाली होगी। 00:03:13:15,00:03:16:18, एक विशाल छतरी इस पर लगातार छाया रखेगी 00:03:16:19,00:03:20:04, ताकि इसके उपकरण शून्य से 233 अंश सेल्सियस 00:03:20:05,00:03:25:05, नीचे का तापमान बनाये रख सकें। 00:03:26:09,00:03:30:02, ये दूरबीन पृथ्वी की नहीं बल्कि 00:03:30:03,00:03:33:21, हमसे 15 लाख किलोमीटर दूर 00:03:33:22,00:03:38:02, सूर्य की कक्षा में स्थापित होगी। 00:03:38:03,00:03:41:07, आधी सदी पहले पैलोमर स्थित हेल दूरबीन 00:03:41:08,00:03:43:04, इतिहास की सबसे बड़ी दूरबीन थी। 00:03:43:04,00:03:47:08, पर आज की यह और भी बड़ी दूरबीन विराट गहन अन्तरिक्ष में विचरण करेगी। 00:03:47:08,00:03:51:16, हम केवल़ अभी कल्पना ही कर सकते हैं कि कौन से अजूबे ये दिखायेगी। 00:03:51:17,00:03:53:22, बस प्रतीक्षा कीजिये। 00:03:54:08,00:03:57:02, धुन के धनी अभियन्ता लगातार नित नयी 00:03:57:03,00:03:59:23, क्रान्तिकारी दूरबीनों की परिकल्पना में लगे रहेंगे। 00:03:59:24,00:04:04:06, कनाडा के वैज्ञानिकों ने तथाकथित द्रवीय-दर्पण-दूरबीन बना ली है। 00:04:04:07,00:04:07:10, इसमें तारे का प्रकाश ठोस दर्पण के बजाय 00:04:07:11,00:04:11:14, एक घूमते हुये पात्र में रखे पारे के 00:04:11:15,00:04:14:20, वक्र तल से परावर्तित होता है। 00:04:14:21,00:04:18:14, पर अपनी बनावट के कारण ऐसी दूरबीन बस सीधा ऊर्ध्वाधर ही देख सकती है। 00:04:18:15,00:04:21:08, पर इसका निर्माण सरल 00:04:21:09,00:04:23:14, और ये सस्ती होती है। 00:04:23:15,00:04:26:16, उधर रेडियो खगोलशास्त्रियों की कामना है कि वे लोफार 00:04:26:17,00:04:29:14, जैसा किन्तु छोटा एण्टेनाओं का जाल 00:04:29:15,00:04:33:02, धरती की रेडियो बाधाओं से दूर चन्द्रमा पर लगायें। 00:04:33:03,00:04:35:18, कौन जानता है कि एक दिन चन्द्रमा के पिछले पृष्ठ एक 00:04:35:19,00:04:38:14, सामान्य प्रकाश वाली बड़ी दूरबीन लगायी जाय। 00:04:38:15,00:04:41:14, एक्स-रे खगोलशास्त्रियों को आशा है 00:04:41:15,00:04:44:04, कि वे भविष्य में अंतरिक्ष में उपगूहन चकतियां लगा 00:04:44:05,00:04:45:06, अपनी दृष्टि और भी तेज़ कर लेंगे। 00:04:45:07,00:04:47:23, शायद वे किसी ब्लैकहोल की 00:04:47:24,00:04:49:24, बाहरी धार भी देख लें। 00:04:51:18,00:04:54:19, एक दिन दूरबीन ही उस सनातन प्रश्न का उत्तर हमें दिलायेगी 00:04:54:20,00:05:01:01, कि क्या हम ब्रह्माण्ड में नितान्त अकेले हैं? 00:05:04:16,00:05:08:00, हमें पता है बाहर दूसरे और सौर-मण्डल हैं। 00:05:08:02,00:05:10:12, ये भी अनुमान है कि वहाँ पृथ्वी जैसे ग्रह हो सकते हैं। 00:05:10:14,00:05:12:10, शायद पानी से परिपूर्ण। 00:05:12:12,00:05:13:10, पर 00:05:13:12,00:05:15:16, क्या वहाँ जीवन है? 00:05:16:12,00:05:20:08, ऐसे धरातीत ग्रहों की खोज करना कठिन कार्य है। 00:05:20:10,00:05:22:22, मुख्य तारे के तेज़ प्रकाश में 00:05:22:22,00:05:26:04, ये ग्रह नहीं देखे जा सकते। 00:05:27:02,00:05:30:06, अंधियारे अंतरिक्ष में स्थापित व्यतिकरणमापी यंत्र 00:05:30:08,00:05:32:24, भविष्य में इसका हल शायद दे सकेंगे। 00:05:32:24,00:05:35:18, इस समय नासा एक नयी योजना - 00:05:35:18,00:05:38:08, टैरेस्ट्रियल प्लैनेट फाइण्डर - पर कार्य कर रहा है। 00:05:38:10,00:05:42:22, और यूरोप के वैज्ञानिक सोच रहे हैं डारविन एरे के बारे में। 00:05:42:24,00:05:46:14, छः अलग-अलग अन्तरिक्ष दूरबीनें जो क्रमबद्ध सूर्य की परिक्रमा करेंगी। 00:05:46:16,00:05:50:18, लेज़र प्रकाश की सहायता से इनकी परस्पर दूरी को नैनोमीटर की शुद्धता से रखा जायेगा। 00:05:50:18,00:05:54:10, संयुक्त रूप से इनकी 00:05:54:10,00:05:58:06, इतनी विश्लेषण शक्ति होगी कि 00:05:58:08,00:06:02:00, तारों के गिर्द घूमते पृथ्वी जैसे ग्रह स्पष्ट दिखायी दें। 00:06:02:20,00:06:07:02, खगोलशास्त्री निश्चय ही अगले क्रम में ग्रह से परावर्तित प्रकाश को पढ़ेंगे। 00:06:07:04,00:06:12:04, उसका वर्णक्रम ग्रह के वायुमण्डल का परिचायक होगा। 00:06:12:04,00:06:15:12, हो सकता है अगले 15 वर्ष में हम वहां 00:06:15:12,00:06:17:20, आक्सीजन, मीथेन और ओज़ोन की उपस्थिति का पता लगा लें। 00:06:17:22,00:06:21:00, ये हैं जीवन के चिह्न। 00:06:23:04,00:06:25:18, ब्रह्माण्ड आश्चर्यों से भरा पड़ा है। 00:06:25:20,00:06:28:04, आकाश हमें सदैव पुकारते रहता है। 00:06:28:06,00:06:31:04, इसीलिये विश्व में लाखों शौकिया लोग 00:06:31:04,00:06:33:18, प्रति निर्मल रात अपनी दूरबीनें लेकर 00:06:33:20,00:06:35:10, उसे निहारने निकल पड़ते हैं। 00:06:35:10,00:06:37:18, उनकी दूरबीनें गैलीलियो के मुकाबले 00:06:37:20,00:06:39:04, कहीं अधिक शक्तिशाली हैं। 00:06:39:04,00:06:42:20, उनके डिजिटल चित्र कुछ दशक पहले 00:06:42:20,00:06:45:24, के पेशेवर खगोलशास्त्रियों के चित्रों को मात देते हैं। 00:06:46:00,00:06:49:10, इस ब्रह्माण्डिकी अन्वेषण का दूरबीन वाला 00:06:49:10,00:06:52:24, दौर बस 400 साल पुराना है। 00:06:52:24,00:06:57:06, अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। 00:06:57:18,00:07:01:02, गैलीलियो ने चार सदी पहले जो कार्य शुरू किया था 00:07:01:04,00:07:04:10, उसमें हम बहुत आगे निकल आये हैं। 00:07:04:10,00:07:07:16, आज भी हम ब्रह्माण्ड को दूरबीनों से खंगालते हैं। 00:07:07:16,00:07:13:00, और पृथ्वी की सीमा हमने पार कर ली हैं। 00:07:13:02,00:07:16:18, मानवता का सार यही है 00:07:16:20,00:07:19:22, - विपुल अन्तर्दृष्टि और जानने की अभिलाषा। 00:07:19:24,00:07:22:14, हमने कुछ महान सनातन प्रश्नों के उत्तर 00:07:22:14,00:07:24:16, खोजने बस आरम्भ ही किये हैं। 00:07:24:16,00:07:27:08, अब तक हमने अपनी आकाशगंगा में 00:07:27:08,00:07:31:10, दूसरे तारों के गिर्द 300 से अधिक ग्रह खोज लिये हैं 00:07:31:10,00:07:34:24, और कुछ कार्बनिक यौगिकों की उपस्थिति भी। 00:07:34:24,00:07:39:16, शायद ऐसा लगे मानो हमने खोज का शिखर छूँ लिया हो। 00:07:39:17,00:07:43:18, पर इससे और बेहतर आना अभी बाकी है। 00:07:43:20,00:07:46:16, आप भी इस अभियान में जुड़ सकते हैं। 00:07:46:16,00:07:51:10, बस ऊपर जो है उसे विस्मय भरी आँखोँ से निहारिये।